ब्रोकरेज फर्म Systematix ने भारतीय रुपये को लेकर चिंताजनक अनुमान जारी किया है। कंपनी का मानना है कि रुपया हर साल औसतन **6.5%** कमजोर होगा, जिसके पीछे ट्रेड डेफिसिट और घटती एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस मुख्य कारण हैं।
रुपये की चाल पर बड़ा खतरा
भारतीय रुपये के लिए आने वाला समय काफी चुनौतीपूर्ण दिख रहा है। Systematix की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय करेंसी में सालाना 6.5% की गिरावट का अनुमान है। अगर पिछले दो सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो रुपया पहले ही 17% तक कमजोर हो चुका है, जो ₹83 से फिसलकर ₹97 के करीब पहुंच गया है।
क्यों दबाव में है रुपया?
यह गिरावट सिर्फ अस्थाई नहीं, बल्कि स्ट्रक्चरल समस्याओं का नतीजा है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में देश का ट्रेड डेफिसिट करीब $87 बिलियन तक पहुंच गया है। इसमें चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा सबसे बड़ी चुनौती है, जो सालाना आधार पर $120 बिलियन के स्तर पर है। Reserve Bank of India (RBI) लगातार करेंसी को बचाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पिछले दो फाइनेंशियल ईयर (FY25 और FY26) में RBI ने अपने कुल फॉरेन करेंसी एसेट स्टॉक का करीब 98% इस्तेमाल कर लिया है, फिर भी दबाव कम नहीं हो रहा।
एक्सपोर्टर्स के लिए सीमित फायदा
आम तौर पर करेंसी कमजोर होने से एक्सपोर्टर्स को फायदा होता है, लेकिन यहां स्थिति कुछ और है। भारत की कई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर हैं। जैसे-जैसे रुपया गिरता है, आयात का खर्चा बढ़ जाता है, जो एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई को खत्म कर देता है। इसका असर हाल ही में दिखा, जब सर्विस एक्सपोर्ट 18% गिरकर $49 बिलियन पर आ गया।
निवेशकों के लिए सबक
यह स्थिति भारतीय कंपनियों के लिए दो धारी तलवार जैसी है। जिन कंपनियों का कामकाज आयात पर टिका है, उनके प्रॉफिट मार्जिन पर चोट पड़ सकती है। वहीं, IT और फार्मा जैसी कंपनियां जो डॉलर में कमाई करती हैं, उन्हें कुछ राहत मिल सकती है। Systematix ने चेतावनी दी है कि अगर ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स बढ़ते हैं या विदेशी निवेश का रुख बदलता है, तो विदेशी मुद्रा का भंडार तेजी से खाली हो सकता है। निवेशकों के लिए अब कंपनियों के ट्रेड बैलेंस और उनके करेंसी हेजिंग स्ट्रैटेजी को करीब से ट्रैक करना बेहद जरूरी हो गया है।
