Surat अब **$30 बिलियन** का बड़ा कंजम्पशन मार्केट बन चुका है, जो घरेलू खर्च के मामले में Bengaluru जैसे बड़े महानगरों को भी पीछे छोड़ रहा है। शहर में डिस्क्रिशनरी खर्च और वित्तीय अनुशासन की बदौलत यह देश का नया 'बूमटाउन' बनकर उभरा है।
भारत के कंज्यूमर इकोनॉमी का नक्शा तेजी से बदल रहा है। अब तक Mumbai, Delhi और Bengaluru जैसे बड़े शहर कारोबारियों की पहली पसंद हुआ करते थे, लेकिन $30 बिलियन के मार्केट साइज के साथ Surat ने एक नई लकीर खींची है। यह बदलाव केवल बढ़ती आबादी का नतीजा नहीं है, बल्कि खर्च करने के तरीके में आया बड़ा बदलाव है।
खर्च का नया पैटर्न
करीब एक दशक पहले तक परिवारों का बड़ा बजट खाने-पीने की चीजों पर खर्च होता था, लेकिन अब यह घटकर 31% पर आ गया है। लोग अब पैसा ट्रांसपोर्ट, एजुकेशन और हाउसिंग जैसे डिस्क्रिशनरी क्षेत्रों में खर्च कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि वीकेंड पर Surat का खर्च सामान्य दिनों के मुकाबले दोगुना से भी ज्यादा होता है, जो लग्जरी और प्रीमियम लाइफस्टाइल की बढ़ती भूख को दर्शाता है।
वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline)
Surat के लोग पुराने महानगरों की तुलना में काफी जागरूक हैं। यहां के 92% परिवार इमरजेंसी के लिए बचत करते हैं। शहर का डेट-टू-इनकम रेश्यो महज 15.4% है, जबकि भारत के टॉप 6 महानगरों में यह आंकड़ा 18.5% है। यानी यहां का खर्च कर्ज के भरोसे नहीं, बल्कि अपनी कमाई से हो रहा है।
जोखिम और चुनौतियां
हालांकि, यह रफ्तार कुछ बड़े जोखिम भी लेकर आई है। शहर की अर्थव्यवस्था अभी भी डायमंड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल पर बहुत अधिक निर्भर है। ग्लोबल कमोडिटी साइकिल या इंटरनेशनल डिमांड में गिरावट आने पर यहां का कंजम्पशन सीधे प्रभावित हो सकता है। साथ ही, इनपुट कॉस्ट और बढ़ती एनर्जी कीमतों का दबाव भी विकास की रफ्तार को धीमा कर सकता है।
सरकार की ओर से कनेक्टिविटी और औद्योगिक क्षमता बढ़ाने के लिए ₹18,800 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जो भविष्य के लिए एक बड़ा आधार बन सकते हैं।
