सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं। **7-8 नवंबर** को केवल ग्रीन पटाखों की सीमित अनुमति दी गई है, साथ ही पुराने वाहनों पर बैन लगा दिया गया है, जिसका असर रीजनल लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट दिल्ली के प्रदूषण संकट पर लगातार नजर बनाए हुए है। कोर्ट ने फेस्टिव सीजन के दौरान खतरनाक प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के लिए कई सख्त उपाय लागू किए हैं। कोर्ट ने 7 और 8 नवंबर, 2026 को केवल निर्धारित समय के लिए सर्टिफाइड ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी है। इसके बाद पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध फिर से लागू हो जाएगा।
वाहनों पर नकेल
प्रदूषण को कम करने के लिए प्रशासन ने वाहनों की आवाजाही पर भी पाबंदी बढ़ा दी है। दिल्ली सरकार ने उन वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है जो BS-VI एमिशन मानकों को पूरा नहीं करते। यह नियम 31 जनवरी, 2027 तक प्रभावी रहेगा, ताकि सर्दियों में शहर को धुंध (smog) से बचाया जा सके।
बिजनेस और लॉजिस्टिक्स पर असर
इन सख्त पर्यावरण नियमों का सीधा असर नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में काम करने वाले व्यवसायों पर पड़ रहा है। जो कंपनियां रोड लॉजिस्टिक्स, फ्रेट मूवमेंट और डेली डिलीवरी पर निर्भर हैं, उन्हें Graded Response Action Plan (GRAP) और वाहनों पर लगी पाबंदियों के कारण सप्लाई चेन में देरी का सामना करना पड़ सकता है।
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रदूषण के ये मुद्दे कंपनियों की शॉर्ट-टर्म प्रोडक्टिविटी और ऑपरेशनल कॉस्ट को प्रभावित कर सकते हैं। रिटेल, ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर, जो इंटर-स्टेट कनेक्टिविटी पर निर्भर हैं, उन्हें इन बाधाओं के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बाजार के जानकारों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि ये प्रतिबंध कितने प्रभावी साबित होते हैं और यदि स्थिति गंभीर बनी रहती है, तो क्या और अधिक सख्त नियम लागू किए जाएंगे।
