Supreme Court ने पटाखों पर लगी पाबंदियों के खराब क्रियान्वयन पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सुझाव दिया है कि Virat Kohli जैसे प्रभावशाली चेहरे लोगों को प्रदूषण के प्रति जागरूक करें, साथ ही 'Green Crackers' की सख्ती से जांच के निर्देश दिए हैं।
प्रदूषण पर कोर्ट की फटकार
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ कर दिया है कि केवल कागजों पर आदेश जारी करने से काम नहीं चलेगा। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने माना है कि दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने के लिए हर साल जो न्यायिक निर्देश दिए जाते हैं, वे जमीनी स्तर पर असरदार नहीं हो पा रहे हैं। अब कोर्ट ने युवाओं और आम जनता के व्यवहार को बदलने के लिए क्रिकेट के दिग्गज Virat Kohli जैसे प्रभावशाली व्यक्तियों की भागीदारी का प्रस्ताव रखा है।
Green Crackers की सच्चाई पर सवाल
अदालत की नाराजगी की मुख्य वजह 'Green Crackers' के नाम पर हो रही धांधली है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में बताया कि बाजार में बिक रहे पटाखों के पास अक्सर वैध QR कोड नहीं होते और उनकी टेस्टिंग भी संदिग्ध है। इसके बाद, कोर्ट ने 'Commission for Air Quality Management' को निर्देश दिया है कि वह मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और सेल्स पॉइंट्स पर अचानक छापेमारी करे और 'Graded Response Action Plan' (GRAP) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करे।
इंडस्ट्री की चुनौती और मार्केट पर असर
पटाखा इंडस्ट्री की ओर से पेश वकील जे. साई दीपक ने चेतावनी दी है कि बहुत अधिक प्रतिबंधों से ब्लैक मार्केट को बढ़ावा मिल सकता है, जहाँ बिना किसी रेगुलेशन के खतरनाक पटाखे बिक सकते हैं। हालांकि, कोर्ट ने साफ कर दिया कि फिलहाल उनकी पहली प्राथमिकता पब्लिक हेल्थ है।
निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह घटनाक्रम भारत में तेजी से बदलते ESG (Environmental, Social, and Governance) मानकों का संकेत है। दिल्ली-NCR में काम करने वाली मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को अब बदलते पर्यावरणीय नियमों के प्रति और अधिक सतर्क रहना होगा, क्योंकि आने वाले समय में सख्त सरकारी नीतियां किसी भी वक्त उनके ऑपरेशन्स में बाधा डाल सकती हैं।
