केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शुगर मिलों को सलाह दी है कि वे चीनी के अलावा इथेनॉल और बायोगैस प्रोडक्शन पर ध्यान दें। यह बदलाव ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचने और मुनाफे को स्थिर करने के लिए जरूरी है, हालांकि निवेशकों को सरकारी पॉलिसी के जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भारतीय शुगर मिलों से चीनी उत्पादन पर अपनी निर्भरता कम करने का आग्रह किया है। सरकार का मानना है कि ग्लोबल मार्केट में ब्राजील के दबदबे और कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भारतीय मिलों को बायो-एनर्जी, जैसे इथेनॉल और कॉम्प्रैस्ड बायोगैस (CBG) की तरफ रुख करना चाहिए, ताकि फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बनी रहे।\n\n### बायो-एनर्जी की ओर बढ़ता कदम\n\nकेंद्र सरकार शुगर सेक्टर को ग्रीन फ्यूल इकोनॉमी के साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। गन्ने के रस को सीधे इथेनॉल में बदलकर और कृषि कचरे (जैसे पराली) से बायोगैस बनाकर मिलें अपनी आय का एक नया और फिक्स्ड जरिया बना सकती हैं। इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के जरिए सरकार की तरफ से लगातार डिमांड बनी रहती है, जो चीनी के साइक्लिक बिजनेस के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित है।\n\n### निवेश और रेग्युलेटरी रिस्क\n\nहालांकि यह बदलाव मार्जिन बढ़ाने के लिए बेहतर है, लेकिन निवेशकों को सरकारी पॉलिसी से जुड़े जोखिमों को भी समझना होगा। हाल के वर्षों में हमने देखा है कि कैसे इथेनॉल फीडस्टॉक पर अचानक लगी पाबंदियों के कारण कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ा है। इसके अलावा, CBG प्लांट लगाने और इथेनॉल कैपेसिटी बढ़ाने में भारी इन्वेस्टमेंट की जरूरत होती है, जिससे कंपनियों पर कर्ज बढ़ सकता है।\n\n### निवेशकों के लिए अहम संकेत\n\nनिवेशकों को अब Balrampur Chini, Shree Renuka Sugars और Triveni Engineering जैसी कंपनियों की फाइनेंशियल हेल्थ और उनके कर्ज-इक्विटी रेश्यो पर नजर रखनी होगी। प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का समय और सरकारी खरीद की कीमतें ही तय करेंगी कि ये कंपनियां चीनी के उतार-चढ़ाव वाले चक्र से बाहर निकलकर बायो-एनर्जी से अपनी कमाई कितनी स्टेबल बना पाती हैं।
