सभी भारतीय राज्य अब अपनी GSDP गणना के लिए 2022-23 के बेस ईयर को अपनाएंगे। वित्त वर्ष 2027 के अंत तक होने वाले इस बदलाव से आर्थिक आंकड़ों में स्पष्टता आएगी, लेकिन निवेशकों को डेटा में आने वाले अस्थायी उतार-चढ़ाव पर नजर रखनी होगी।
भारत के आर्थिक डेटा के मापने का तरीका अब बदलने वाला है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश दिया है कि वे अपनी सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) गणना के लिए 2022-23 को बेस ईयर के रूप में इस्तेमाल करें। इस कदम का मुख्य उद्देश्य राज्य के आंकड़ों को केंद्र की नई राष्ट्रीय अकाउंट सीरीज के साथ जोड़ना है, जिसे 2026 की शुरुआत में अपडेट किया गया था।
बेस ईयर अपडेट क्यों जरूरी है?
अभी तक अधिकांश राज्य 2011-12 के पुराने बेस ईयर का इस्तेमाल कर रहे थे, जो एक दशक से भी ज्यादा पुराना हो चुका है। इस दौरान भारत की अर्थव्यवस्था में डिजिटल ट्रांस्फॉर्मेशन, सर्विस सेक्टर का विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव आए हैं। नया बेस ईयर अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को बेहतर तरीके से दर्शाएगा, जिससे निवेशकों को राज्यों के प्रदर्शन को समझने में अधिक स्पष्टता मिलेगी।
फिस्कल हेल्थ और ग्रोथ पर असर
निवेशकों और एनालिस्ट्स के लिए यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है। जब बेस ईयर बदलता है, तो अर्थव्यवस्था का नॉमिनल आकार भी बदल जाता है। इसे 'डिनॉमिनेटर इफेक्ट' कहते हैं। यदि GSDP का आंकड़ा ऊपर की ओर संशोधित (Revise) होता है, तो राज्यों का कर्ज-जीडीपी अनुपात और फिस्कल डेफिसिट प्रतिशत कागजों पर कम दिख सकता है, भले ही वास्तविक कर्ज का स्तर वही बना रहे।
इसके अलावा, ट्रांजिशन फेज के दौरान ग्रोथ रेट में कुछ समय के लिए अस्थिरता या 'आर्टिफिशियल स्पाइक्स' दिख सकते हैं। निवेशकों को यह सावधानी बरतनी होगी कि वे केवल सांख्यिकीय सुधार (Statistical Recalibration) को असली आर्थिक ग्रोथ न समझ बैठें।
डिस्ट्रिक्ट लेवल पर भी सुधार
यह बदलाव केवल राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिस्ट्रिक्ट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (DDP) गणनाओं में भी लागू होगा। इससे स्थानीय स्तर की प्लानिंग और बेहतर हो सकेगी। जो कंपनियां क्षेत्रीय विस्तार या रिटेल एंट्री की योजना बना रही हैं, उन्हें अब प्रोडक्शन हब और कंजम्पशन पैटर्न की ज्यादा सटीक जानकारी मिल पाएगी। आने वाले समय में जैसे-जैसे राज्य नए डेटा जारी करेंगे, यह क्षेत्रीय निवेश के मौकों को पहचानने का एक नया पैमाना बनेगा।
