Zoho के को-फाउंडर Sridhar Vembu ने सरकार के उस कदम का समर्थन किया है जिसमें विदेशी मुद्रा (Forex) बचाने के लिए अनावश्यक खर्चों पर कटौती की बात कही गई है। **7.8%** की दर से बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह एक अहम फैसला माना जा रहा है।
Zoho के को-फाउंडर Sridhar Vembu ने हाल ही में उन अपीलों का समर्थन किया है, जिनमें नागरिकों से विदेशी दौरों, डेस्टिनेशन वेडिंग और सोने की खरीदारी जैसे फालतू खर्चों पर संयम बरतने को कहा गया है। भारत की जीडीपी ग्रोथ अभी 7.8% के मजबूत स्तर पर है, लेकिन लंबी अवधि की आर्थिक मजबूती के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है।
क्यों जरूरी है विदेशी मुद्रा का संरक्षण?
भारत की तेज विकास यात्रा के लिए ऊर्जा और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी जैसे कि सेमीकंडक्टर और स्पेशलाइज्ड मशीनरी के आयात (Import) के लिए भारी विदेशी मुद्रा की जरूरत होती है। वेम्बु के अनुसार, यदि हम अपना फॉरेक्स (Forex) लग्जरी चीजों पर खर्च करेंगे, तो औद्योगिक निवेश के लिए पूंजी कम पड़ सकती है।
'एशियन टाइगर्स' मॉडल से सीख
वेम्बु ने जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन जैसे देशों का उदाहरण दिया है, जिन्हें 'एशियन टाइगर्स' कहा जाता है। इन देशों ने अपनी तेजी के दौर में उपभोक्ता खर्च को सीमित कर विदेशी मुद्रा का उपयोग औद्योगिक क्षमता बढ़ाने में किया था। इसी रणनीति के कारण आज वे अपनी तकनीक खुद बना पा रहे हैं।
निवेशकों के लिए संकेत
सरकार का यह कदम ग्लोबल सप्लाई चेन की अनिश्चितताओं से लड़ने और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कोशिश है। अब बाजार की नजरें भारत के ट्रेड डेफिसिट और रुपये की स्थिरता पर टिकी हैं। अगर देश अपनी पूंजी को औद्योगिक विस्तार और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में लगा पाता है, तो लंबी अवधि में इसका बड़ा फायदा अर्थव्यवस्था को मिलेगा।
