शेयर बाजार की तेजी के बीच भी भारतीय परिवारों का भरोसा सरकारी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स (Small Savings Schemes) पर बना हुआ है। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच इन योजनाओं में **₹1.54 लाख करोड़** का निवेश आया है, जो सुरक्षित रिटर्न के प्रति निवेशकों के बढ़ते रुझान को दर्शाता है।
भारतीय निवेशक इस समय सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के पहले चार महीनों में सरकारी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स का कलेक्शन ₹1.54 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹98,259 करोड़ था। इस रफ्तार को देखते हुए सरकार का पूरे साल का ₹3.59 लाख करोड़ का लक्ष्य समय से पहले ही पूरा होने की उम्मीद है।
क्यों सुरक्षित हैं ये स्कीम्स?
इन योजनाओं की सबसे बड़ी ताकत इनका सरकारी गारंटी वाला फिक्स्ड रिटर्न है। फिलहाल, निवेशकों को इन पर 6.9% से 8.2% तक का ब्याज मिल रहा है। Senior Citizens Savings Scheme और Sukanya Samriddhi Yojana पर 8.2%, जबकि Public Provident Fund (PPF) पर 7.1% और National Savings Certificate (NSC) पर 7.7% का रिटर्न मिल रहा है। बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहने वाले निवेशकों के लिए ये स्कीम्स एक मजबूत विकल्प बनी हुई हैं।
सरकारी खजाना और बैंकिंग सेक्टर पर असर
इस शानदार परफॉर्मेंस से सरकार को अपनी बाजार उधारी (Market Borrowings) को कम करने में बड़ी मदद मिल रही है। हालांकि, बैंकिंग सेक्टर के लिए यह एक चुनौती भी है। जब स्मॉल सेविंग्स की ब्याज दरें बैंक डिपॉजिट्स से अधिक होती हैं, तो बैंकों के लिए पैसा जुटाना मुश्किल हो जाता है। इसका सीधा असर बैंकों की कॉस्ट ऑफ फंड्स और लोन दरों पर पड़ सकता है।
आगे की राह
साल के आखिरी क्वार्टर में टैक्स सेविंग सीजन के चलते इन योजनाओं में निवेश और बढ़ने की संभावना है। चूंकि मौजूदा 4 महीनों में ही वार्षिक लक्ष्य का 43% हासिल कर लिया गया है, इसलिए अब निवेशकों की नजर ब्याज दरों की अगली समीक्षा पर टिकी है। किसी भी बदलाव का सीधा असर आपकी सेविंग्स और बैंक डिपॉजिट्स के बीच के कॉम्पिटिशन पर पड़ेगा।
