West Asia Conflict: युद्ध के 6 महीने, शेयर बाजार में उठा-पटक के बीच कौन से सेक्टर चमके?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
West Asia Conflict: युद्ध के 6 महीने, शेयर बाजार में उठा-पटक के बीच कौन से सेक्टर चमके?

वेस्ट एशिया विवाद के 6 महीने पूरे हो चुके हैं। इस दौरान Nifty 50 में **4.3%** की गिरावट आई है। जहां FMCG और Oil & Gas पर दबाव रहा, वहीं Pharma और Realty जैसे सेक्टर्स ने निवेशकों को **17%** तक का रिटर्न देकर बचाया है।

वेस्ट एशिया में फरवरी 2026 के अंत से शुरू हुए तनाव ने भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त अस्थिरता पैदा कर दी है। इस 6 महीने की अवधि में Nifty 50 इंडेक्स करीब 4.3% टूटा है। हालांकि, बाजार की इस गिरावट का असर सभी सेक्टर पर एक जैसा नहीं रहा है।

सेक्टर्स का हाल

पब्लिक सेक्टर बैंक, Oil & Gas और FMCG सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जहां कुछ इंडेक्स में 13% तक की गिरावट देखी गई। ये सेक्टर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और मैक्रो-इकोनॉमिक बदलावों के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं।

दूसरी ओर, Realty, Pharmaceuticals और मेटल्स (Metals) जैसे सेक्टर ने मजबूती दिखाई है। इन क्षेत्रों में निवेशकों का रुझान बढ़ा और इन्होंने 17% तक का रिटर्न दिया है। डिफेंसिव सेक्टर होने के कारण फार्मा और रियल एस्टेट ने बाजार की गिरावट में एक सुरक्षा कवच का काम किया है।

क्रूड ऑयल का दबाव और Smallcap का जलवा

बाजार में चिंता की सबसे बड़ी वजह वैश्विक ऊर्जा बाजार रही है। Brent crude की कीमतें $70 से बढ़कर $120 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। इसका सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ा, जो मई 2026 में रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया था।

इन सबके बावजूद, Nifty Smallcap 100 इंडेक्स एक एक्सेप्शन रहा और इसने 24% की शानदार तेजी दिखाई। यह दिखाता है कि विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के बावजूद घरेलू लिक्विडिटी (Liquidity) बाजार को सहारा दे रही है।

निवेशकों के लिए आगे की राह

अब बाजार की चाल तीन प्रमुख कारकों पर टिकी है: रुपये की स्थिरता, कच्चे तेल (Crude oil) की कीमतें और मॉनसून की स्थिति। कमजोर रुपया कॉर्पोरेट मुनाफे पर चोट कर सकता है, जबकि महंगाई का दबाव आने वाले समय में कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.