वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman **18 सितंबर** से दो दिवसीय शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 'Viksit Bharat' रोडमैप के तहत राज्यों और केंद्र की आर्थिक नीतियों को एक साथ लाना है, जिससे Infrastructure, Energy और Agriculture सेक्टर में बड़े बदलावों की नींव रखी जाएगी।
आर्थिक एजेंडे पर चर्चा
इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्र और राज्यों के अधिकारी एक मंच पर जुटेंगे। इसका मुख्य मकसद पॉलिसी प्लानिंग और असल धरातल पर काम की रफ्तार के बीच के अंतर को कम करना है। सरकार का जोर इस बात पर है कि कैसे राष्ट्रीय विस्तार के लिए आवश्यक पूंजी (Capital) को अनलॉक किया जाए।
इंफ्रास्ट्रक्चर और फिस्कल पॉलिसी पर फोकस
यह सम्मेलन तीन बड़े सेक्टरों पर केंद्रित होगा: आर्थिक विकास, कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण और नेशनल एनर्जी ट्रांजिशन। बाजार के जानकारों के लिए Renewable Energy जैसे ट्रांसमिशन नेटवर्क और कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी के फाइनेंसिंग मॉडल चर्चा का मुख्य विषय रहेंगे। जब राज्य और केंद्र की नीतियां आपस में तालमेल बिठाती हैं, तो कंस्ट्रक्शन, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करना आसान हो जाता है।
इसके अलावा, बैठक में GST 2.0 फ्रेमवर्क पर चर्चा की संभावना है। बिज़नेस जगत के लिए टैक्स स्ट्रक्चर में कोई भी सुधार कंप्लायंस कॉस्ट को कम कर सकता है। निवेशकों को यह देखना होगा कि ये सुधार राज्यों के रेवेन्यू को कैसे प्रभावित करते हैं, क्योंकि इसी से तय होगा कि राज्य सरकारें पब्लिक प्रोजेक्ट्स पर कितना खर्च कर पाएंगी।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
यह समिट सिर्फ सरकारी समन्वय के बारे में नहीं है, बल्कि यह भारत में भविष्य के कैपिटल स्पेंडिंग का आधार तैयार करेगा। प्राइवेट कैपिटल को जुटाने की रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है, जो यह संकेत देगी कि सरकार किन सेक्टरों को प्राथमिकता दे रही है। बाजार की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या इन चर्चाओं के बाद प्रोजेक्ट अप्रूवल की रफ्तार तेज होती है या नहीं।
