वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की **7.8%** की जीडीपी ग्रोथ को ग्लोबल झटकों से बचाने का रोडमैप तैयार कर लिया है। सरकार अब राजकोषीय अनुशासन और घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में 'कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव' के दौरान भारत की आर्थिक दिशा को स्पष्ट किया है। उन्होंने 'स्ट्रक्चरल ऑटोनॉमी' पर जोर देते हुए कहा कि भारत को बाहरी वैश्विक अस्थिरता से बचाने के लिए हमें अपनी क्षमताएं खुद विकसित करनी होंगी। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की 7.8% जीडीपी ग्रोथ का श्रेय पिछले एक दशक के बैंकिंग रिफॉर्म्स और राजकोषीय अनुशासन को दिया गया है।
मजबूत आर्थिक बुनियाद
इन्वेस्टर्स के लिए अच्छी खबर यह है कि भारत की वित्तीय स्थिति काफी मजबूत है। सरकार का टारगेट फिस्कल डेफिसिट को 4.3% तक सीमित रखने का है। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) करीब USD 766 बिलियन के स्तर पर है, जो करेंसी की गिरावट के खिलाफ एक मजबूत कवच का काम करेगा। अगस्त 2026 तक नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 18.8% रही है, जो आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत है।
'इमेजिन्ड एंड मेड इन इंडिया' का नया विजन
सरकार अब सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग नहीं, बल्कि इनोवेशन आधारित 'इमेजिन्ड एंड मेड इन इंडिया' मॉडल की तरफ बढ़ रही है। इसके लिए 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन' और 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' को लॉन्च किया गया है। प्राइवेट सेक्टर के लिए ₹1 लाख करोड़ की नई 'रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन स्कीम' शुरू की जा रही है, ताकि भारत की R&D स्पेंडिंग को मौजूदा 0.83% से बढ़ाकर OECD औसत 2.7% के करीब लाया जा सके।
रिस्क और चुनौतियां
वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनाव, शिपिंग रूट में रुकावट और एनर्जी की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़े रिस्क हैं। फिलहाल मुद्रास्फीति (Inflation) करीब 4.8% के दायरे में है। आने वाले महीनों में प्राइवेट सेक्टर का रिसर्च में निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाला खर्च ही तय करेगा कि भारत की यह विकास गाथा कितनी लंबी चलेगी।
