दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब सरकार पर पराली जलाने के आंकड़ों को छिपाने का आरोप लगाया है। दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बिगड़ने के बाद GRAP का दूसरा चरण लागू कर दिया गया है, जिससे निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ा है।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि राज्य सरकार जानबूझकर पराली जलाने की घटनाओं को छिपा रही है। सिरसा ने दावा किया कि पंजाब सरकार ने अपनी छवि सुधारने के लिए करीब ₹20-25 करोड़ का प्रचार किया, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।\n\nअपने दावों को पुख्ता करते हुए सिरसा ने कहा कि पंजाब में अब तक 271 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। उनका अनुमान है कि वास्तविक आग की घटनाएं 1,000 से ज्यादा हैं, जिसका मतलब है कि सरकारी रिपोर्टों में आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। इसके अलावा, उन्होंने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए।\n\nइस सियासी घमासान के बीच दिल्ली की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। 2 नवंबर, 2026 को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 324 दर्ज किया गया, जो 'बेहद खराब' (Very Poor) श्रेणी में आता है। इस स्थिति को देखते हुए अधिकारियों को 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) का दूसरा चरण लागू करना पड़ा है।\n\nआर्थिक मोर्चे पर देखें तो प्रदूषण पर ये सख्ती बड़े बदलाव लेकर आई है। GRAP के दूसरे चरण के तहत निर्माण कार्यों, डीजल जनरेटर के उपयोग और विशिष्ट औद्योगिक ऑपरेशन्स पर सख्त पाबंदियां लगा दी गई हैं। इन प्रतिबंधों के चलते रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के प्रोजेक्ट्स में देरी हो सकती है, जिससे कारोबारियों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।\n\nनिवेशकों और बाजार के जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि क्या CAQM (कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट) आगे चलकर और कड़े कदम उठाएगा। यदि स्थिति नहीं सुधरी और GRAP का तीसरा या चौथा चरण लागू हुआ, तो औद्योगिक गतिविधियों पर इसका बड़ा आर्थिक असर पड़ सकता है।
