Sikkim सरकार ने 16 हिमनद झीलों को 'अति संवेदनशील' (Extreme Danger Zone) की श्रेणी में रखा है। इस फैसले के बाद Teesta नदी बेसिन में स्थित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के सामने नियमों का पालन करने और लागत बढ़ने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
हाई-अलर्ट पर प्रशासन
Sikkim सरकार ने इन झीलों को 'Category A' साइट्स के रूप में चिन्हित किया है, जो 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स' (GLOF) के लिहाज से सबसे खतरनाक हैं। सरकार अब रिएक्टिव के बजाय प्रोएक्टिव अप्रोच अपना रही है, जिसमें रिमोट सेंसिंग और जियोफिजिकल सर्वे के जरिए खतरों की मैपिंग की जा रही है।
हाइड्रोपावर सेक्टर पर असर
यह कदम साल 2023 की उस आपदा के बाद उठाया गया है, जिसने 1,200 MW के Teesta-III हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को तबाह कर दिया था। सरकार अब National GLOF Risk Mitigation Project (NGRMP) के तहत काम कर रही है, जिसका कुल आउटले ₹150 करोड़ है। इसमें पानी को निकालने के लिए साइफनिंग और डैम को सुरक्षित करने के लिए मजबूत दीवारें बनाने जैसे इंजीनियरिंग हस्तक्षेप शामिल हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम
हाइड्रोपावर कंपनियों के लिए अब कड़े नियम लागू होने वाले हैं। 'National Disaster Management Authority' (NDMA) क्लाइमेट-रेजिलिएंट डिजाइन पर जोर दे रही है, जिसका सीधा असर प्रोजेक्ट्स की शुरुआती कैपिटल स्पेंडिंग (Capex) पर पड़ेगा।
- कॉस्ट प्रेशर: प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ेगी और मेंटेनेंस का खर्चा भी ज्यादा होगा।
- इंश्योरेंस प्रीमियम: क्षेत्र में बढ़ते रिस्क असेसमेंट के कारण इंश्योरेंस प्रीमियम में उछाल आ सकता है।
- प्रोजेक्ट टाइमलाइन: कड़े सेफ्टी नॉर्म्स के चलते प्रोजेक्ट्स पूरा होने में देरी संभव है।
अब बाजार की नजर इस बात पर है कि कंपनियां इन बढ़ती लागतों को अपने फाइनेंशियल मॉडल्स में कैसे एडजस्ट करती हैं, ताकि मार्जिन पर असर न पड़े।
