पूर्व RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने साल 2047 तक भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए 5 बड़े फाइनेंशियल पिलर्स का प्रस्ताव दिया है। इस प्लान का मुख्य फोकस क्रेडिट उपलब्धता, बॉन्ड मार्केट में गहराई और इंश्योरेंस-पेंशन सेक्टर का विस्तार करना है।
क्रेडिट और बैंकिंग की पहुंच का विस्तार
किसी भी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए क्रेडिट की उपलब्धता रीढ़ की हड्डी होती है। दास ने जोर दिया है कि भारत को अपने क्रेडिट-टू-GDP रेश्यो को बढ़ाने की जरूरत है ताकि औद्योगिक विकास को रफ्तार मिल सके। विजन के मुताबिक, अब बैंकों का ध्यान टियर-2 और टियर-3 शहरों पर अधिक होगा। छोटे कर्जदाताओं और क्षेत्रीय बैंकों को स्मॉल बिजनेस और एग्रीकल्चर सेक्टर में कर्ज बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर का विस्तार तेज होगा, जिससे लेंडर्स को रेवेन्यू ग्रोथ मिल सकती है।
बॉन्ड मार्केट में जान फूंकने की तैयारी
भारत का कॉर्पोरेट डेट मार्केट अभी काफी हद तक प्राइवेट प्लेसमेंट पर टिका है। दास ने पब्लिक इश्यू मॉडल की ओर शिफ्ट होने का सुझाव दिया है, जिससे मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी और आम रिटेल निवेशक भी सीधे बॉन्ड मार्केट से जुड़ सकेंगे। इसके अलावा, म्युनिसिपल बॉन्ड मार्केट को मजबूत करना भी प्राथमिकता है। शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे पानी, ट्रांसपोर्ट और वेस्ट मैनेजमेंट के लिए स्थानीय निकायों को बड़े फंड की जरूरत होगी। यदि स्थानीय निकायों का गवर्नेंस सुधरा, तो निवेशकों के लिए निवेश के नए विकल्प तैयार होंगे।
इंश्योरेंस और पेंशन के लिए नया सुरक्षा चक्र
भारत का इंश्योरेंस सेक्टर अभी ₹74 लाख करोड़ से अधिक की एसेट मैनेज कर रहा है, लेकिन अभी भी आबादी का एक बड़ा हिस्सा इसके दायरे से बाहर है। डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच के जरिए इसे हर घर तक पहुंचाने की तैयारी है। वहीं, पेंशन सिस्टम में बदलाव करके असंगठित क्षेत्र को भी मुख्यधारा में लाने पर काम होगा। इसका उद्देश्य भारतीय परिवारों की सेविंग्स को गोल्ड और रियल एस्टेट से हटाकर फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स की ओर मोड़ना है। यह बदलाव इंश्योरेंस कंपनियों और पेंशन फंड मैनेजर्स के लिए लंबी अवधि का गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
