हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय बाजारों में सुस्ती दिखी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया है कि अमेरिका के साथ ट्रेड नेगोशिएशन फिलहाल एक पड़ाव (plateau) पर रुक गए हैं, जिससे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर के निवेशकों में सावधानी बढ़ गई है।
सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार एक मजबूत शुरुआत के बाद सुस्त पड़ गए। ट्रेड नेगोशिएशन से जुड़ी खबर आते ही सेंसेक्स अपने इंट्रा-डे पीक से करीब 350 अंक फिसल गया। सुबह 10:22 बजे तक सेंसेक्स 383.98 अंकों की बढ़त के साथ 72,293.68 पर कारोबार कर रहा था, लेकिन सेंटीमेंट में सतर्कता साफ दिख रही थी।
बातचीत क्यों अटकी?
म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में बोलते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड बातचीत फिलहाल आगे नहीं बढ़ पा रही है। उन्होंने कहा कि लंबी बातचीत के बाद अब दोनों ही देशों के लिए आगे रियायतें (concessions) देना मुश्किल हो रहा है। इस बयान ने उन कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है जो अपनी एक्सपोर्ट स्ट्रैटेजी के लिए इन ट्रेड समझौतों पर निर्भर थीं।
पीयूष गोयल की कोशिशें
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 29 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक अमेरिका का दौरा किया था, जिसका मकसद एक अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट (interim trade agreement) तक पहुंचना था। बाजार को उम्मीद थी कि इससे कोई बड़ा ब्रेकथ्रू निकलेगा, लेकिन अभी फिलहाल कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
अमेरिका लगातार भारत के साथ ट्रेड इम्बैलेंस (trade imbalance) का मुद्दा उठाता रहा है। अगर यह बातचीत इसी तरह अटकी रहती है, तो IT, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में अनिश्चितता बढ़ सकती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टैरिफ या व्यापारिक बाधाएं बनी रहती हैं, तो एक्सपोर्ट करने वाली बड़ी कंपनियों की बिजनेस प्लानिंग प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) भी एक स्टेबल ट्रेड एनवायरनमेंट की उम्मीद कर रहे हैं, और सरकार के अगले कदमों पर ही बाजार की आगे की दिशा तय होगी।
