5 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों में तेज़ी के साथ शुरुआत हुई। BSE Sensex **600** अंकों से ज़्यादा उछला और Nifty **24,660** के पार निकला। ग्लोबल बाज़ार से मिले सकारात्मक संकेतों और कम होती भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच यह तेज़ी देखी गई। अब निवेशकों का ध्यान रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की आने वाली मॉनेटरी पॉलिसी पर है।
बाज़ार में क्यों आई तेज़ी?
5 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों ने शानदार मोमेंटम के साथ दिन की शुरुआत की। BSE Sensex 600 से ज़्यादा पॉइंट चढ़कर 79,000 के ऊपर कारोबार कर रहा था। वहीं, Nifty 50 भी इस ट्रेंड में शामिल रहा और 24,669 के स्तर के करीब खुला। यह व्यापक रिकवरी निवेशकों के सेंटिमेंट में आए बदलाव को दर्शाती है, क्योंकि बाज़ारों ने वैश्विक स्तर पर सकारात्मक घटनाओं पर प्रतिक्रिया दी है।
ग्लोबल फैक्टर का असर
सुबह की इस बढ़त का मुख्य कारण ग्लोबल संकेत थे। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव में कमी की रिपोर्टों ने तेल की कीमतों को स्थिर करने में मदद की, जो भारत जैसे कमोडिटी-आयात करने वाले देशों के लिए चिंता का विषय था। इसके साथ ही, वॉल स्ट्रीट पर रिकॉर्ड-ब्रेकिंग क्लोजिंग ने प्रमुख एशियाई सूचकांकों में खरीदारी की रुचि को प्रोत्साहित किया और यह तेज़ी भारतीय बाज़ार में भी देखने को मिली।
RBI की पॉलिसी पर नज़र
फिलहाल बाज़ार का सेंटिमेंट सकारात्मक है, लेकिन निवेशक रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। गवर्नर संजय मल्होत्रा आज ब्याज दरों पर कमेटी के फैसले की घोषणा करेंगे। बाज़ार की मौजूदा उम्मीद यह है कि रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा जाएगा। एक स्थिर ब्याज दर का माहौल आमतौर पर कंपनियों की उधार लागत और उपभोक्ता मांग के लिए सहायक माना जाता है।
महंगाई पर कमेंट्री अहम
हालांकि, भविष्य में महंगाई को लेकर सेंट्रल बैंक की कमेंट्री एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनी रहेगी। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मॉनसून के प्रदर्शन को लेकर अनिश्चितता महंगाई के अनुमानों के लिए जोखिम पैदा कर रही है। गवर्नर की ओर से कोई भी आक्रामक या सतर्क टिप्पणी आने वाले सत्रों में बाज़ार की दिशा को प्रभावित कर सकती है।
अन्य महत्वपूर्ण बातें
निवेशक हाल ही में लागू हुई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) मैकेनिज्म के साथ भी तालमेल बिठा रहे हैं, जिसने ट्रेड एग्जीक्यूशन में एक नया पहलू जोड़ा है। सूचकांकों के इन ऊंचे स्तरों पर कारोबार करने के साथ, बाज़ार प्रतिभागी इस बात पर नज़र रख रहे हैं कि फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) का इनफ्लो बना रहता है या दिन के दौरान मुनाफावसूली (Profit Booking) होती है। मुख्य ध्यान सेंट्रल बैंक के पॉलिसी स्टैंड और मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल के उसके आकलन पर रहेगा।
