ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के बीच बुधवार को बाजार में भारी बिकवाली देखी गई। Sensex **813** अंक टूटकर **74,015** के स्तर पर बंद हुआ, जिसका मुख्य कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें हैं।
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार का दिन बिकवाली के नाम रहा। बेंचमार्क इंडेक्स Sensex 813 अंक गिरकर 74,015 पर बंद हुआ, वहीं Nifty 50 में भी 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,181 के स्तर पर आ गया। बाजार में चौतरफा दबाव दिखा, लेकिन सबसे ज्यादा मार फाइनेंशियल सेक्टर पर पड़ी।
क्यों दबाव में है मार्केट?
बाजार की इस सुस्ती के पीछे ग्लोबल इकोनॉमी से जुड़े कुछ बड़े फैक्टर्स हैं। अमेरिका का 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड फिलहाल 5.1% के आसपास है, जो साल 2007 के बाद से सबसे ऊंचे स्तर पर है। जब अमेरिकी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलता है, तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों (Emerging Markets) जैसे भारत से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी एसेट्स में निवेश करने लगते हैं।
इसके अलावा, क्रूड ऑयल की कीमतें $91 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई बढ़ाती हैं और ब्याज दरों (Interest Rates) के लंबे समय तक ऊंचे रहने का खतरा पैदा करती हैं, जो इक्विटी मार्केट के लिए नकारात्मक माना जाता है।
फाइनेंशियल स्टॉक्स की हालत खस्ता
HDFC Life और Bajaj Finance के शेयरों में करीब 5% की गिरावट देखने को मिली। फाइनेंशियल कंपनियां इकोनॉमिक ग्रोथ और क्रेडिट डिमांड पर निर्भर होती हैं, इसलिए मैक्रो-इकोनॉमिक बदलावों का सबसे पहले असर इन्हीं पर पड़ता है।
करेंसी और जियोपॉलिटिकल रिस्क
डॉलर के मुकाबले रुपया भी 95.80 से 96.10 के दायरे में संघर्ष कर रहा है। कमजोर रुपया आयात को महंगा बना रहा है, जिससे महंगाई का डर और बढ़ गया है। साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ने एनर्जी सप्लाई को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है।
निवेशकों की नजरें अब क्रूड ऑयल और बॉन्ड यील्ड की स्थिरता पर टिकी हैं। ट्रेडर्स के लिए Nifty का 23,040 का सपोर्ट लेवल अहम रहने वाला है। जब तक ग्लोबल मार्केट में तनाव कम नहीं होता, बाजार में सतर्कता बनी रहेगी।
