BSE Sensex में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में कोहराम का आलम यह है कि **74** बड़े ब्लू-चिप शेयर अपने **52-वीक लो** (52-week low) पर पहुंच गए हैं। FIIs की ताबड़तोड़ बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के **5.3%** पर पहुंचने से निवेशकों का सेंटीमेंट बुरी तरह बिगड़ा है।
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल एक कठिन दौर से गुजर रहा है। BSE Sensex और Nifty 50 में लगातार चौथे सेशन में गिरावट देखने को मिली है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बाजार की चौड़ाई (Breadth) काफी कमजोर हो गई है, जिसके चलते 74 दिग्गज कंपनियों के शेयर साल के निचले स्तर यानी 52-वीक लो पर आ गए हैं। इस बिकवाली के पीछे विदेशी निवेशकों का हाथ है, जिन्होंने पिछले सिर्फ 2 ट्रेडिंग दिनों में ₹20,128 करोड़ से ज्यादा का माल निकाल लिया है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर
विदेशी निवेशकों की इस भारी निकासी की मुख्य वजह अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड है, जो 5.3% के ऊंचे स्तर पर है। जब अमेरिका जैसे देशों में सुरक्षित निवेश पर इतना अच्छा रिटर्न मिलता है, तो विदेशी फंड्स भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालकर वहां शिफ्ट करने लगते हैं। इस कैपिटल फ्लाइट ने कई लार्ज-कैप स्टॉक्स को सहारा विहीन कर दिया है। हालांकि, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने मोर्चा संभाला है और उन्होंने हालिया सेशन में करीब ₹11,272 करोड़ की खरीदारी की है, लेकिन विदेशी बिकवाली का दबाव इतना अधिक है कि DIIs का सपोर्ट भी नाकाफी साबित हो रहा है।
सेक्टरवार दबाव
बाजार की इस मार का असर हर सेक्टर पर अलग-अलग दिख रहा है। FMCG सेक्टर का इंडेक्स 52-वीक लो पर आ गया है, क्योंकि कंपनियां लागत बढ़ने और मांग में सुस्ती की दोहरी मार झेल रही हैं। वहीं, इंश्योरेंस और फाइनेंशियल स्पेस में भी हलचल है। IRDAI के नए नियमों को लेकर अनिश्चितता के कारण PB Fintech जैसे शेयरों में बड़ी गिरावट दिखी है। ऑटो सेक्टर में भी Maruti Suzuki और Mahindra & Mahindra जैसे दिग्गज प्लेयर्स कंजम्पशन में कमी और वेस्ट एशिया के जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं से जूझ रहे हैं।
आगे क्या रखें ध्यान?
वेस्ट एशिया का तनाव बाजार के लिए सबसे बड़ा रिस्क बना हुआ है। इससे तेल की कीमतों (Brent Crude) में अस्थिरता का डर है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। निवेशकों की नजर अब इस पर होगी कि क्या अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है और क्या भारतीय घरेलू निवेशकों का पैसा बाजार को गिरने से रोक पाता है।
