ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली हुई है। BSE Sensex **1,200** अंकों से ज्यादा गिरकर बंद हुआ, जबकि Nifty50 **23,100** के अहम स्तर के नीचे फिसल गया।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का गहरा असर
बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आया उछाल है। 10-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.106% के स्तर पर पहुंच गई है, जो साल 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है। जब अमेरिकी बॉन्ड सुरक्षित और बेहतर रिटर्न देने लगते हैं, तो विदेशी निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स जैसे कि भारत से अपना पैसा निकालकर डॉलर एसेट्स की तरफ मोड़ने लगते हैं। साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की संभावना ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
कच्चे तेल और रुपये पर दबाव
बाजार की सेंटीमेंट को बिगाड़ने में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों का भी बड़ा हाथ है। ब्रेंट क्रूड $102 प्रति बैरल के पार चला गया है। भारत के लिए यह दोहरा संकट है—एक तरफ इंपोर्ट बिल बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ महंगाई का खतरा। इसका सीधा असर करेंसी पर पड़ा है और भारतीय रुपया गिरकर डॉलर के मुकाबले 95.87 के स्तर पर आ गया है।
बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली
फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया। प्राइवेट बैंक इंडेक्स और फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स दोनों में लगभग 2% की गिरावट रही। Bajaj Finance का शेयर तो 5% से ज्यादा टूटा। इसके अलावा Axis Bank, HDFC Bank, और Kotak Mahindra Bank के शेयरों में भी बिकवाली हावी रही। बैंक शेयरों के लिए बढ़ती ब्याज दरें चुनौती बनी हुई हैं क्योंकि इससे लोन की मांग पर असर पड़ सकता है।
