ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के कारण भारतीय बाजार में हाहाकार मचा है। सोमवार को BSE Sensex **72,771** के स्तर पर बंद हुआ, जो कि बीते **6** महीनों का निचला स्तर है। पिछले एक महीने में निवेशकों को **₹17.17 लाख करोड़** का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।
सोमवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए भारी चिंता लेकर आया। BSE Sensex 1,124 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 72,771 पर बंद हुआ, वहीं Nifty 50 भी 22,800 के स्तर के नीचे फिसल गया। पिछले 30 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो बाजार में आई बिकवाली ने निवेशकों की कुल ₹17.17 लाख करोड़ की संपत्ति साफ कर दी है।
बाजार पर दबाव क्यों?
इस गिरावट की मुख्य वजह घरेलू नहीं, बल्कि ग्लोबल फैक्टर्स हैं। खाड़ी देशों में भू-राजनीतिक तनाव के चलते Brent Crude की कीमतें $108 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत के लिए कच्चा तेल महंगा होने का मतलब है आयात बिल में बढ़ोतरी और महंगाई का खतरा, जो अंततः ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर पानी फेर रहा है।
इसके साथ ही, 10-वर्षीय US Treasury Bonds की यील्ड 5.2% के पार चली गई है। जब सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलता है, तो Foreign Institutional Investors (FIIs) उभरते बाजारों से पैसा निकालकर वहां लगाने लगते हैं। यही कारण है कि FIIs लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिसका सीधा असर हमारे प्रमुख सूचकांकों पर दिख रहा है।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा मार?
बिकवाली का असर हर तरफ है, लेकिन बैंकिंग (PSU Banks), टेलीकॉम और पावर सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव है। ये सेक्टर कर्ज और पूंजीगत खर्च पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, इसलिए ब्याज दरों में अनिश्चितता इन्हें सीधे प्रभावित कर रही है। हालांकि, चार्ट्स पर नज़र रखें तो Nifty के लिए 22,400 से 22,600 का दायरा एक मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है। फिलहाल, निवेशक मिडिल ईस्ट की स्थिति और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर अपनी नजरें जमाए हुए हैं।
