ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों और ईरान-अमेरिका तनाव के कारण भारतीय बाजारों में भारी बिकवाली हुई। सेंसेक्स **989** अंक फिसल गया, जबकि निफ्टी **50** ने **23,000** का अहम सपोर्ट लेवल तोड़ दिया है।
भू-राजनीतिक तनाव और बाजार पर असर
आज का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ। मिडिल ईस्ट में बढ़ती टेंशन और ईरान के प्रस्ताव को राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा खारिज किए जाने के बाद ग्लोबल सप्लाई चेन पर खतरा मंडराने लगा है। इस अनिश्चितता का सीधा असर भारतीय इंडेक्स पर दिखा। Nifty 50 में 1.39% की गिरावट आई और यह 22,819.40 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स ने 72,832.08 के निचले स्तर को छुआ।
कच्चे तेल की महंगाई और महंगाई का डर
दुनियाभर में एनर्जी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। Brent crude का दाम $105 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, वहीं West Texas Intermediate (WTI) $93-$94 के बीच कारोबार कर रहा है। भारत, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, के लिए यह महंगाई का एक बड़ा कारण बन सकता है। बढ़ती इनपुट कॉस्ट के चलते कॉर्पोरेट मुनाफे पर मार पड़ने की आशंका है, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट पूरी तरह से बिगड़ गया है।
चौतरफा बिकवाली, सिर्फ एक शेयर बचा
आज बाजार में कोई भी सेक्टर सुरक्षित नहीं रहा। Nifty PSU Bank इंडेक्स 2.51% गिरकर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। इसके अलावा, बैंकिंग और रियल्टी इंडेक्स में क्रमशः 1.80% और 1.75% की कमजोरी देखी गई। बड़े दिग्गजों की बात करें तो Adani Enterprises 2.67% और Adani Ports 2.57% तक नीचे गिरे। ऑटो सेक्टर का हाल भी बुरा रहा; Nifty Auto इंडेक्स 1.61% टूटा, जिसमें Mahindra & Mahindra और Tata Motors पर दबाव दिखा। हालांकि, पूरे बाजार की मंदी के बीच Dr. Reddy's Laboratories एकमात्र शेयर रहा, जिसने 2% की बढ़त दर्ज की।
विदेशी संकेत अभी भी कमजोर
बाजार में लिक्विडिटी का संकट भी गहरा रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और मजबूत डॉलर के कारण विदेशी निवेशक (FIIs) लगातार बिकवाली मोड में हैं। जब तक मिडिल ईस्ट की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक बाजारों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने के पूरे आसार हैं।
