26 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखी गई। ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम **$90** प्रति बैरल के नीचे आने से निवेशकों का सेंटिमेंट सुधरा है, हालांकि मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी से पहले सतर्कता बनी हुई है।
26 अगस्त 2026 को भारतीय इक्विटी मार्केट हरे निशान के साथ खुला। इस तेजी के पीछे की मुख्य वजह ग्लोबल एनर्जी कीमतों में आई गिरावट है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम घटकर $90 प्रति बैरल से नीचे आ गए हैं। हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव कम होने के चलते तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं घटी हैं, जिसका सीधा फायदा मार्केट को मिल रहा है।
भारत के लिए तेल के दाम क्यों अहम हैं?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। ग्लोबल लेवल पर तेल की कीमतें कम होने से देश के आयात बिल में बड़ी राहत मिलती है। निवेशकों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि कच्चे माल और फ्यूल की लागत कम होने से मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन सुरक्षित रहते हैं। साथ ही, यह महंगाई को कंट्रोल में रखने और करेंसी को मजबूती देने में भी मददगार साबित होता है।
ग्लोबल संकेत और बाजार का मूड
एनर्जी सेक्टर के अलावा ग्लोबल सेंटीमेंट्स का भी बाजार पर असर दिखा है। अमेरिकी टेक स्टॉक्स में सुधार और बॉन्ड यील्ड में नरमी ने निवेशकों के रिस्क लेने की क्षमता को बढ़ाया है। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) लगातार खरीदारी कर रहे हैं, जो भारतीय बाजार को सपोर्ट दे रहा है। हालांकि आज 'ईद-ए-मिलाद' की सेटलमेंट छुट्टी है, फिर भी एक्सचेंज पर कामकाज सामान्य रूप से जारी है।
सावधानियां और आगे की राह
तेजी के बावजूद बाजार में सावधानी जरूरी है। सबसे बड़ा ट्रिगर मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी है, जिसके कारण बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) बढ़ सकता है। मिडल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव अब भी नाजुक बना हुआ है, और कोई भी नकारात्मक खबर मार्केट का रुख बदल सकती है। फिलहाल निवेशकों को क्रूड ऑयल की स्टेबिलिटी, FIIs के फ्लो और एक्सपायरी के दौरान मार्केट की चाल पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
