भारतीय शेयर बाजार बुधवार, 5 अगस्त 2026 को हरे निशान में बंद हुए। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट को **5.25%** पर स्थिर रखा और वित्त वर्ष 2027 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर **6.7%** कर दिया। BSE Sensex **152** अंक चढ़कर **78,581** पर बंद हुआ। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन से जुड़ी अस्थिरता ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।
RBI की पॉलिसी का बाजार पर असर
RBI के इस फैसले से निवेशकों को बड़ी राहत मिली है। सेंट्रल बैंक ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को न्यूट्रल बनाए रखने का निर्णय लिया, जिसके तहत रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह 5.25% पर ही बना हुआ है। इस फैसले के साथ ही, RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत के ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) ग्रोथ का अनुमान 6.7% तक बढ़ा दिया है, जिसने बाजार का सेंटिमेंट और बेहतर किया है। इसके अलावा, महंगाई दर के अनुमान को कम करना भी एक सकारात्मक संकेत रहा, जिससे यह जाहिर होता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर विकास पथ पर है।
किन सेक्टर्स में दिखी खरीदारी?
बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। ऑटो, रियल एस्टेट और मेटल जैसे सेक्टर्स में खास तौर पर निवेश बढ़ा, जिसने इंडेक्स को ऊपर ले जाने में मदद की। पॉलिसी के स्थिर रहने से निवेशकों को थोड़ी राहत मिली और उन्होंने बड़े मैक्रोइकॉनोमिक कंसर्न को नजरअंदाज कर ट्रेडिंग सेशन में हिस्सा लिया।
बाजार पर मंडराते खतरे
हालांकि, बाजार में कुछ चुनौतियां भी बनी रहीं। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में करीब $80.7 प्रति बैरल तक का इजाफा देखने को मिला। तेल की बढ़ी कीमतें भारत के लिए आयात लागत बढ़ा सकती हैं, जिससे घरेलू कंपनियों के मुनाफे और महंगाई पर दबाव पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भी वैश्विक और घरेलू निवेशकों की चिंताएं बढ़ाई हैं।
नए क्लोजिंग ऑक्शन का असर
इसके अतिरिक्त, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) स्टॉक्स के लिए नए लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) से भी अस्थिरता देखी गई। इस बदलाव के कारण इंट्रा-डे में कीमतों में उतार-चढ़ाव आया। यह ट्रेडर्स को याद दिलाता है कि बाजार की चाल अब स्ट्रक्चरल पॉलिसी बदलावों और ग्लोबल मैक्रो फैक्टर्स, दोनों से प्रभावित हो रही है।
आगे चलकर, निवेशक इन वैश्विक कारकों के घरेलू आर्थिक संकेतकों पर पड़ने वाले प्रभाव पर नजर रखेंगे। RBI का ग्रोथ आउटलुक भले ही सपोर्टिव हो, लेकिन बाजार की यह तेजी आने वाले आर्थिक आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात के विकास पर निर्भर करेगी।
