Sensex, Nifty: क्रूड ऑयल के भाव में आग, $106 के पार निकलते ही बाजार में मची बिकवाली

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Sensex, Nifty: क्रूड ऑयल के भाव में आग, $106 के पार निकलते ही बाजार में मची बिकवाली

ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों और बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण भारतीय बाजारों पर भारी दबाव है। Brent Crude के भाव **$106.86** प्रति बैरल तक पहुंचने से महंगाई और रुपये की कमजोरी की चिंता ने निवेशकों को बिकवाली के लिए मजबूर कर दिया है, जिससे Sensex और Nifty50 दोनों लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।

भारतीय इक्विटी मार्केट में मंगलवार को लगातार गिरावट का दौर जारी रहा। सप्लाई चेन में बाधाओं और ग्लोबल अनिश्चितता के कारण निवेशकों का सेंटीमेंट बिगड़ा हुआ है। BSE Sensex 250 अंक गिरकर 72,521.43 पर बंद हुआ, जबकि Nifty50 22,700 के स्तर के नीचे फिसल गया। यह गिरावट पिछले सत्र की उस भारी बिकवाली के बाद आई है, जिसमें BSE-लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹8.92 लाख करोड़ घट गया था।

क्रूड ऑयल का बढ़ता संकट

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एनर्जी मार्केट को हिला कर रख दिया है। Brent Crude में 1.5% की तेजी के साथ यह $106.86 प्रति बैरल तक पहुंच गया है। भारत के लिए यह बड़ी चिंता है क्योंकि हम अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करते हैं। तेल की बढ़ती कीमतों से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जो राजकोषीय घाटे (Fiscal Balance) और महंगाई पर दबाव डालेगा। निवेशक इस बात से डरे हुए हैं कि आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के मार्जिन पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।

रुपये में कमजोरी और RBI की चुनौती

डॉलर के मुकाबले रुपया 16 पैसे टूटकर 96.13 के स्तर पर आ गया है। कमजोर रुपया इंपोर्ट को महंगा बनाता है, जिससे महंगाई और बढ़ती है। इन हालात ने Reserve Bank of India (RBI) की भविष्य की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है। अब देखना यह है कि सेंट्रल बैंक ग्रोथ को सपोर्ट करने और महंगाई को काबू में रखने के बीच संतुलन कैसे बनाता है।

ग्लोबल मार्केट का मूड

सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में डर का माहौल है। US Federal Reserve की भविष्य की पॉलिसी को लेकर निवेशक अपनी उम्मीदें बदल रहे हैं। इस दबाव के चलते सोने (Gold) जैसे कीमती धातुओं में भी गिरावट देखी गई है, जो फिलहाल $4,124.57 प्रति औंस के करीब सात सप्ताह के निचले स्तर पर है। मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने और ग्लोबल सप्लाई चेन पर स्पष्टता आने तक बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.