14 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के दबाव में बाजार नकारात्मक रुख के साथ कारोबार कर रहा है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की लगातार खरीदारी से बाजार को कुछ सहारा मिल रहा है, लेकिन निवेशक वैश्विक सप्लाई की चिंताओं का आकलन कर रहे हैं, जिससे बाजार एक दायरे में बंधा हुआ है।
मिडिल ईस्ट संकट का बाजार पर असर
14 अगस्त 2026 को शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और पूरे ट्रेडिंग सेशन के दौरान BSE Sensex और NSE Nifty में सुस्ती छाई रही। बाजार में यह लगातार गिरावट वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की भावना (risk-off sentiment) को दर्शाती है, जिसका मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है।
FIIs की बिकवाली, DIIs की खरीदारी
फिलहाल बाजार में विदेशी और घरेलू निवेशकों के बीच खींचतान देखने को मिल रही है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले सत्र में लगभग ₹510 करोड़ की बिकवाली की है, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने गुरुवार को ₹4,353 करोड़ की नेट खरीदारी की है। DIIs की इस लगातार खरीदारी ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने में अहम भूमिका निभाई है।
कच्चे तेल की कीमतों पर नजर
बाजार में अनिश्चितता का एक और प्रमुख कारण ऊर्जा की कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $87 प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं, जो पिछली अस्थिरता की तुलना में कुछ राहत देती हैं। फिर भी, बाजार मिडिल ईस्ट में सप्लाई चेन को बाधित करने वाली किसी भी घटना के प्रति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें कॉर्पोरेट मुनाफे को कम कर सकती हैं और अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं।
तकनीकी स्तर पर कंसॉलिडेशन
तकनीकी तौर पर, बाजार एक विशेष कंसॉलिडेशन रेंज में कारोबार कर रहा है। विश्लेषकों की नजर Nifty 50 पर है, जो वर्तमान में 23,800 और 24,400 के स्तरों के बीच चल रहा है। किसी मजबूत पॉजिटिव ट्रिगर की अनुपस्थिति में, सूचकांकों के लिए इस दायरे से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि निवेशक वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिरता और संस्थागत प्रवाह के रुझानों पर अधिक स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों को आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक संघर्ष की तीव्रता पर बारीकी से नजर रखनी होगी, क्योंकि यह वैश्विक सप्लाई चेन के लिए जोखिम पैदा कर रहा है। इसके अतिरिक्त, FIIs और DIIs की दैनिक गतिविधियां यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगी कि वर्तमान रेंज-बाउंड ट्रेंड जारी रहेगा या बाजार पर और दबाव बढ़ेगा। कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं, ऐसे में कोई भी अचानक वृद्धि सेंटीमेंट को और खराब कर सकती है।
