ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के संकेतों के बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 7% से अधिक की गिरावट आई है, जिसके चलते सोमवार को भारतीय शेयर बाजारों में जोरदार तेजी देखी गई। तेल की कम कीमतें आमतौर पर भारत के आयात बिल को कम करती हैं और महंगाई को काबू में रखने में मदद करती हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। मेटल और एफएमसीजी जैसे सेक्टर्स में खरीदारी के दम पर यह रैली देखी गई, जबकि एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा।
बाजार में आई रौनक, Sensex और Nifty में बड़ी बढ़त
सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजारों में शानदार तेजी देखने को मिली। BSE Sensex 789 अंक चढ़कर 78,883.34 के स्तर पर पहुंच गया, वहीं NSE Nifty 50 ने 189 अंकों की बढ़त के साथ 24,572.70 पर कारोबार की शुरुआत की। घरेलू इक्विटी में इस सकारात्मक शुरुआत का मुख्य कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में आई नरमी है, जो भारत की तेल-आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है।
गिरते कच्चे तेल का असर
बाजार का यह सकारात्मक मूड मुख्य रूप से ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स से प्रेरित था, जो 7.3% तक गिरकर $81.55 प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक प्रगति के संकेतों के कारण मध्य पूर्व में बड़े संघर्ष की आशंकाएं कम हुई हैं। भारतीय निवेशकों के लिए, कच्चे तेल की कम कीमतें एक सकारात्मक विकास मानी जाती हैं, क्योंकि यह देश के आयात बिल को नियंत्रित करने, रुपये को सहारा देने और घरेलू विनिर्माण व परिवहन क्षेत्रों पर लागत के दबाव को कम करने में मदद करती हैं।
सेक्टरवार प्रदर्शन और स्टॉक की चाल
बाजार में व्यापक खरीदारी देखी गई। Nifty मेटल इंडेक्स 1.04% की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा, जबकि FMCG सेक्टर 0.89% चढ़ा। फाइनेंशियल सर्विसेज और PSU बैंक स्टॉक्स ने भी इस रैली में हिस्सा लिया, दोनों में 0.6% से अधिक की तेजी आई। शुरुआती कारोबार में Bajaj Finance, Bajaj Finserv, ITC और Larsen & Toubro जैसे प्रमुख शेयरों में 2.7% से अधिक की बढ़त दर्ज की गई।
हालांकि, बाजार का प्रदर्शन एक समान नहीं रहा। प्रमुख इंडेक्स में जहां बढ़त थी, वहीं फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में हल्की गिरावट देखी गई। मीडिया सेक्टर 1.54% की गिरावट के साथ पिछड़ गया। Sun Pharma और Maruti Suzuki जैसे शेयरों पर दबाव देखा गया, जो क्रमशः 2% और 1.5% से अधिक नीचे कारोबार कर रहे थे।
व्यापक बाजार का संदर्भ
मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी खरीदारी दिखी। Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 इंडेक्स क्रमशः 0.45% और 0.94% चढ़े। वैश्विक भावना आम तौर पर सकारात्मक थी, अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में तेजी देखी गई, वहीं एशियाई बाजारों का रुख मिला-जुला रहा। उदाहरण के लिए, हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स में जहां बढ़त थी, वहीं जापान के निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया के कोस्पी में भारी बिकवाली का दबाव देखा गया।
निवेशक अब इन लाभों की स्थिरता पर ध्यान दे रहे हैं, खासकर मानसून की प्रगति और निरंतर ऋण वृद्धि पर। आने वाले हफ्तों में प्रमुख निगरानी योग्य कारकों में कॉरपोरेट आय प्रदर्शन, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) फ्लो पैटर्न और कच्चे तेल की कीमतों में कोई भी और उतार-चढ़ाव शामिल होगा, जो Nifty की 24,500 के स्तर को पार करने की दिशा तय कर सकता है।
