ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के कारण भारतीय बाजार में गुरुवार को बड़ी बिकवाली देखने को मिली। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और ब्रेंट क्रूड का **$102** के पार निकलना निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अब निफ्टी के लिए **23,116** के सपोर्ट लेवल को बचाना बड़ी चुनौती है।
गुरुवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार पर ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक दबाव का असर साफ दिखा। BSE सेंसेक्स 576.59 अंक यानी 0.77% टूटकर 74,251.66 पर बंद हुआ। वहीं, NSE निफ्टी 50 भी 201.60 अंक यानी 0.86% की गिरावट के साथ 23,245.20 के स्तर पर जा पहुंचा। यह मंदी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि हांगकांग और शंघाई जैसे एशियाई बाजारों में भी सतर्कता का माहौल देखा गया।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर
मार्केट में इस दबाव की मुख्य वजह अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी है। 2007 के बाद से बॉन्ड यील्ड अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। सुरक्षित और ज्यादा रिटर्न वाले इन डॉलर-डिनॉमिनेटेड एसेट्स के कारण इमर्जिंग मार्केट्स जैसे भारत से निवेश बाहर निकल रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख से साफ है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं, जिससे लोकल स्टॉक्स के लिए लिक्विडिटी कम हो रही है।
क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें और महंगाई का रिस्क
ब्रेंट क्रूड का $102.50 प्रति बैरल के करीब पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है। भारत कच्चा तेल आयात करने वाला बड़ा देश है, जिससे सीधा असर रुपये पर पड़ता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें मैन्युफैक्चरिंग, पेंट्स और लॉजिस्टिक्स जैसी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल रही हैं। इसके साथ ही, घरेलू महंगाई (Inflation) के बने रहने की आशंका ने सेंट्रल बैंक के हाथों को भी बांध दिया है।
टेक्निकल चार्ट पर क्या है संकेत?
टेक्निकल एक्सपर्ट्स की नजर अब निफ्टी के सपोर्ट लेवल पर है। निफ्टी 50 ने सत्र के दौरान 23,490 के स्तर को पार करने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा। अब बाजार की नजर 23,116 के अहम सपोर्ट जोन पर है। यदि इंडेक्स इस स्तर को होल्ड नहीं कर पाता है, तो बाजार में और बिकवाली बढ़ सकती है और इंडेक्स 22,600 की रेंज तक फिसल सकता है।
