ग्लोबल मार्केट से मिले संकेतों और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के बीच भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त रही। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ है।
बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 की सुबह BSE Sensex ने 400 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार शुरू किया। निवेशकों की घबराहट की मुख्य वजह RBI की आगामी मौद्रिक नीति (Monetary Policy) है। बाजार में चर्चा है कि महंगाई पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय बैंक रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.50% कर सकता है।\n\nब्याज दरें बढ़ने का सीधा मतलब है कि कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। इससे खास तौर पर उन NBFCs और कंपनियों पर मार्जिन का दबाव बढ़ेगा, जिन पर कर्ज का बोझ ज्यादा है। फिलहाल सभी की निगाहें RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की घोषणाओं पर टिकी हैं कि क्या यह दरें बढ़ाने का सिलसिला यहीं थमेगा या आगे भी जारी रहेगा।\n\nबाजार पर ग्लोबल फैक्टर्स का भी गहरा असर है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल $101.50 प्रति बैरल के पास बना हुआ है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें महंगाई को और हवा दे सकती हैं, जिससे सेंट्रल बैंकों के लिए दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखना मजबूरी बन सकता है।\n\nइसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का मूड भी बिगड़ा हुआ है। FIIs ने लगातार आठवें सेशन में बिकवाली की है। पिछले कारोबारी दिन ही विदेशी निवेशकों ने ₹2,961 करोड़ के शेयर बेचे हैं। इस भारी बिकवाली ने सेंसेक्स और निफ्टी की रिकवरी की उम्मीदों को सीमित कर दिया है।
