Sensex का बड़ा क्रैश: ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों से बाजार में हाहाकार

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Sensex का बड़ा क्रैश: ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों से बाजार में हाहाकार

ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के चलते गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स **1,247 अंक** टूटकर **73,581** के स्तर पर बंद हुआ। इस भारी बिकवाली से निवेशकों के **₹2.7 लाख करोड़** डूब गए हैं, जहां FIIs ने **₹5,027 करोड़** के शेयर बेचे।

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिससे बेंचमार्क इंडेक्स पिछले तीन महीनों के निचले स्तर पर आ गए हैं। BSE Sensex 1,247 अंक या 1.7% गिरकर 73,581 पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 50 भी 1.6% फिसलकर 23,063 के स्तर पर आ गया। बाजार की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि Sensex के 30 में से 29 शेयर लाल निशान में बंद हुए।

बाजार पर ग्लोबल दबाव क्यों?

इस गिरावट की मुख्य वजह बाहरी मैक्रो-इकोनॉमिक दबाव है। ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे निवेशकों का रुख इक्विटी जैसे रिस्की एसेट्स से हटकर सुरक्षित निवेश की ओर मुड़ गया है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए तेल की ऊंची कीमतें ट्रेड बैलेंस और करेंसी पर दबाव डालती हैं।

संस्थागत निवेशकों का हाल

गुरुवार के कारोबार में Foreign Institutional Investors (FIIs) ने जमकर बिकवाली की और ₹5,027 करोड़ के शेयर बेचे। हालांकि, Domestic Institutional Investors (DIIs) ने बाजार को संभालने की कोशिश की और ₹4,301 करोड़ की खरीदारी की, लेकिन यह विदेशी बिकवाली को रोकने के लिए नाकाफी साबित हुई। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप एक ही दिन में करीब ₹2.7 लाख करोड़ घट गया।

किन सेक्टरों में दिखी सबसे ज्यादा मार?

बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव दिखा। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से बैंकों को फंड जुटाने की लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर उनके मार्जिन्स पर पड़ता है। HDFC Bank, Axis Bank और Bajaj Finance जैसे दिग्गज शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा Reliance Industries और Bharti Airtel जैसे हैवीवेट शेयरों ने भी इंडेक्स को नीचे खींचने का काम किया।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

अगले कुछ दिनों में निवेशकों को क्रूड ऑयल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड की चाल पर कड़ी नजर रखनी होगी। अगर ये फैक्टर इसी तरह बढ़ते रहे, तो बाजार का सेंटीमेंट सतर्क बना रह सकता है। यह भी देखना जरूरी होगा कि क्या DIIs अपनी खरीदारी जारी रखकर बाजार को सपोर्ट दे पाएंगे या महंगाई की चिंताएं हावी रहेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.