ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में आज भारी बिकवाली देखी गई। Sensex **995 अंक** फिसलकर बंद हुआ, जिसका मुख्य कारण क्रूड ऑयल की कीमतों का **$115** प्रति बैरल के पार जाना और विदेशी निवेशकों (FIIs) का लगातार पैसा निकालना है।
बुधवार के कारोबार में भारतीय बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। BSE Sensex 995 अंक की गिरावट के साथ 72,603 के निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं, Nifty 50 इंडेक्स भी 22,500 के अहम सपोर्ट लेवल के नीचे फिसल गया। बाजार में यह घबराहट मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और एनर्जी लागत में अचानक उछाल की वजह से आई है।
क्रूड ऑयल का बढ़ता खतरा
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा रिस्क बन गई हैं। वेस्ट एशिया में सप्लाई चेन की चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल $115 प्रति बैरल के पार चला गया है। जानकारों का मानना है कि यदि क्रूड की कीमतें इसी तरह बनी रहीं, तो इसका सीधा असर देश के इंपोर्ट बिल और महंगाई पर पड़ेगा, जो कंपनियों के नेट प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
IT सेक्टर पर भारी दबाव
आज के सत्र में IT इंडेक्स में 3.5% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ग्लोबल लेवल पर AI की वजह से बदल रहे बिजनेस ऑपरेशंस और विदेशी क्लाइंट्स द्वारा खर्च में कटौती के चलते भारतीय IT कंपनियों के ग्रोथ आउटलुक पर भी खतरा मंडराने लगा है। लार्ज-कैप IT शेयरों पर बना यह दबाव दिन भर साफ देखा गया।
FIIs की निकासी और US Bond Yields
बाजार में लिक्विडिटी की कमी का एक बड़ा कारण विदेशी निवेशकों (FIIs) का नेट सेलर बने रहना है। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के 5.42% तक पहुंचने से वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर अमेरिकी एसेट्स में निवेश कर रहे हैं, जिससे भारतीय बाजार की लिक्विडिटी सूख रही है।
आगे की चाल के लिए मार्केट की नजरें US Federal Reserve और Bank of Japan की होने वाली बैठकों पर टिकी हैं। जब तक ब्याज दरों और लिक्विडिटी को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) बने रहने के आसार हैं।
