भारतीय शेयर बाज़ार में लगातार छठे दिन गिरावट दर्ज की गई। 18 अगस्त 2026 को Nifty जहाँ **24,154.90** पर बंद हुआ, वहीं FIIs और DIIs ने मिलकर बाज़ार में **₹4,231 करोड़** फूंके। बढ़ती क्रूड ऑयल की कीमतों और ग्लोबल अनिश्चितता के बीच निवेशक सतर्क दिख रहे हैं।
लगातार छठे दिन बाज़ार में गिरावट
18 अगस्त 2026 को भारतीय इक्विटी बाज़ार में लगातार छठे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली। निवेशकों का सेंटिमेंट दबाव में रहा। BSE Sensex दिन के अंत में 492.70 अंक यानी 0.63% की गिरावट के साथ 77,235.46 पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 50 इंडेक्स भी 132.75 अंक या 0.55% की कमजोरी के साथ 24,154.90 पर थमा।
संस्थागत निवेशकों का दिलचस्प खेल
बाज़ार में गिरावट के बावजूद, संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) का रुख गौर करने लायक था। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने, जो इस साल ज़्यादातर बिकवाली कर रहे थे, ₹1,652 करोड़ के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी ₹2,579 करोड़ की नेट खरीदारी जारी रखी। इस तरह कुल मिलाकर ₹4,231 करोड़ की संस्थागत खरीदारी हुई, जो यह दर्शाता है कि गिरते बाज़ार में भी ये निवेशक वैल्यू ढूंढ रहे थे।
कच्चे तेल का बढ़ता संकट और सेक्टर पर असर
दिन की कमजोरी की मुख्य वजह ग्लोबल संकेत और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें थीं। Brent क्रूड ऑयल की कीमत $91 प्रति बैरल के पार जाने से भारत के इम्पोर्ट बिल, महंगाई और रुपए पर चिंताएं बढ़ गई हैं।
इस मैक्रो इकोनॉमिक माहौल का असर अलग-अलग सेक्टर्स पर पड़ा। Information Technology (IT) इंडेक्स 1.9% लुढ़क गया, क्योंकि ग्लोबल ग्रोथ की अनिश्चितता अक्सर IT खर्चों पर असर डालती है। Realty और FMCG सेक्टर में भी बिकवाली का दबाव दिखा, जो क्रमशः 1.4% और 0.7% गिरे। हालांकि, Auto, Media, और Oil & Gas जैसे कुछ डिफेंसिव सेक्टर्स में मजबूती दिखी, जिन्होंने बाज़ार की बिकवाली के बावजूद कुछ हद तक संभल कर दिखाया।
आगे क्या? जानिए टेक्निकल लेवल्स
टेक्निकल एनालिस्ट्स का कहना है कि Nifty ने 24,200 के अहम सपोर्ट लेवल को तोड़ दिया है। इससे नज़दीकी अवधि में बाज़ार की चाल कमजोर हुई है। अब बाज़ार 24,000 और 23,800 के स्तरों पर स्थिरता की तलाश कर सकता है।
निवेशकों को अगले कुछ दिनों में ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों पर नज़र रखनी चाहिए। मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए, ज़्यादातर मार्केट पार्टिसिपेंट्स सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और इंडेक्स में स्थिरीकरण के संकेत मिलने तक स्पेसिफिक स्टॉक पर फोकस कर रहे हैं।
