ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के कारण भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई है। US-Iran तनाव के चलते क्रूड ऑयल की कीमतें **$90** प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिससे निवेशकों में घबराहट है। सेंसेक्स **400** अंकों से ज्यादा टूटा और निफ्टी **24,100** के नीचे फिसल गया है।
सोमवार, 31 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर ग्लोबल मार्केट और क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है।
क्रूड ऑयल का असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ब्रेंट क्रूड ऑयल को $90 प्रति बैरल के स्तर तक धकेल दिया है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की बढ़ती कीमतें एविएशन, पेंट्स, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों के लिए सीधा खतरा हैं। महंगाई का दबाव बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर मार पड़ना तय माना जा रहा है।
MSCI रीबैलेंसिंग की हलचल
बाजार में एक तरफ तनाव था, तो दूसरी तरफ MSCI इंडेक्स रीबैलेंसिंग का तकनीकी दबाव भी हावी रहा। ग्लोबल फंड्स द्वारा अपनी होल्डिंग्स में बदलाव करने के कारण बाजार के आखिरी घंटे में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। Reliance Industries जैसे दिग्गज शेयरों पर खास नजर रही।
सेक्टर का हाल और अपवाद
बिकवाली इतनी चौतरफा थी कि लगभग हर सेक्टर लाल निशान में बंद हुआ। Nifty Media सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जबकि Nifty Metal और Nifty IT में भी बड़ी गिरावट दिखी। Adani Enterprises और Hindalco Industries जैसे स्टॉक्स में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली की। हालांकि, बाजार की इस आंधी में HDFC Bank एक अपवाद रहा, जिसने ब्रोकरेज की पॉजिटिव राय के दम पर 1.15% की बढ़त दर्ज की।
अब बाजार की नजरें भारत के पहली तिमाही के GDP डेटा पर टिकी हैं। यह डेटा बताएगा कि क्या भारतीय अर्थव्यवस्था इन ग्लोबल चुनौतियों को झेलने में सक्षम है या नहीं।
