वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और क्रूड ऑयल के उछलकर **$100** प्रति बैरल के करीब पहुंचने से बाजार सहमा हुआ है। पिछले एक महीने में BSE Sensex करीब **3,000 अंक** गिर चुका है, जबकि रुपया भी **95** के स्तर की ओर तेजी से लुढ़क रहा है।
ग्लोबल मार्केट से मिल रहे खराब संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली का दौर जारी है। 9 सितंबर, 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो BSE Sensex पिछले एक महीने में लगभग 3.8% यानी 3,000 अंक का गोता लगा चुका है। बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतों में आया उछाल है।
इकोनॉमी पर गहरा असर
बढ़ती एनर्जी कॉस्ट का सीधा असर कंपनियों के मार्जिन पर पड़ रहा है। क्रूड ऑयल के $100 प्रति बैरल के करीब पहुंचने से महंगाई का खतरा बढ़ गया है, जिसे लेकर Reserve Bank of India की चिंताएं भी बढ़ सकती हैं। वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के स्तर को छूने की तैयारी में है, जिससे आयात महंगा हो रहा है और बाजार में निवेशकों का सेंटिमेंट खराब है।
FII का पैसा बाहर
कभी भारतीय बाजार के सबसे बड़े खरीदार रहे विदेशी निवेशक (FIIs) अब बिकवाल बन गए हैं। केवल सितंबर महीने में ही विदेशी निवेशकों ने करीब ₹12,700 करोड़ की निकासी की है। इसके पीछे अमेरिका में संभावित ब्याज दरें बढ़ने का डर और ग्लोबल अनिश्चितता मुख्य कारण है।
IPO का असर और सेक्टर का हाल
बाजार में लिक्विडिटी का एक बड़ा हिस्सा नए IPO की तरफ शिफ्ट हो गया है, जिससे सेकेंडरी मार्केट में नकदी की किल्लत बढ़ गई है। बैंकिंग, आईटी और ऑयल एंड गैस सेक्टर पर बिकवाली का सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिल रहा है। फिलहाल, निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह है, क्योंकि बाजार की चाल अब पूरी तरह से कच्चे तेल के दाम और रुपये की मजबूती पर टिकी है।
