Sensex 172 अंक गिरा, Nifty 24,250 के नीचे फिसला: क्यों आई बाजार में गिरावट?

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
Sensex 172 अंक गिरा, Nifty 24,250 के नीचे फिसला: क्यों आई बाजार में गिरावट?

24 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशकों में अमेरिका द्वारा ईरान पर संभावित प्रतिबंधों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता का माहौल रहा। हालांकि, मेटल और आईटी जैसे कुछ सेक्टरों ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की।

वैश्विक चिंताओं का असर, बाजार में गिरावट

24 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजारों ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच गिरावट दर्ज की। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 171.72 अंक या 0.22% गिरकर 77,369.11 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 इंडेक्स 32.95 अंक या 0.14% की गिरावट के साथ 24,219.05 पर बंद हुआ, जो 24,250 के महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के नीचे चला गया।

इस गिरावट की मुख्य वजह भू-राजनीतिक तनाव रही, खासकर अमेरिका द्वारा ईरान पर संभावित आर्थिक प्रतिबंधों की खबरें। इन खबरों के साथ ही कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिससे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में बिकवाली का दबाव देखा गया। ये कारक भारत के आयात बिल और महंगाई पर असर डाल सकते हैं, जिसके चलते निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

सेक्टरों में दिखा मिला-जुला रुझान

बाजार में समग्र गिरावट के बावजूद, विभिन्न सेक्टरों के प्रदर्शन में भिन्नता देखी गई। मेटल और आईटी (IT) सेक्टरों ने मजबूती दिखाई और गिरावट को सीमित करने में मदद की। निवेशकों का झुकाव मेटल शेयरों की ओर दिखा, जिसमें JSW Steel, Hindalco Industries और Tata Steel निफ्टी 50 में टॉप गेनर में से रहे। HCL Technologies में भी खरीदारी देखी गई, जिसने आईटी इंडेक्स को सहारा दिया।

इसके विपरीत, फाइनेंशियल सर्विसेज (Financial Services) और फार्मा (Pharma) सेक्टरों पर भारी बिकवाली का दबाव रहा। निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स और समग्र वित्तीय सेवा क्षेत्र पिछड़ गए, जिससे सूचकांकों पर व्यापक असर पड़ा। दिन के अंत में एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस (SBI Life Insurance), बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance) और बजाज फिनसर्व (Bajaj Finserv) जैसे प्रमुख शेयर लाल निशान में बंद हुए। इन बड़ी वित्तीय कंपनियों में हुई बिकवाली सीधे तौर पर सेंसेक्स की गिरावट का कारण बनी।

आगे की राह और जोखिम

आने वाले दिनों में, बाजार मासिक एफ एंड ओ (F&O) एक्सपायरी के करीब है, जिससे अक्सर अस्थिरता बढ़ जाती है क्योंकि ट्रेडर अपनी पोजीशन एडजस्ट करते हैं। मध्य पूर्व से संभावित भू-राजनीतिक जोखिम और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए प्रमुख चिंताएं बने रहेंगे। यदि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहती हैं, तो यह कॉर्पोरेट लाभ मार्जिन और उन क्षेत्रों में निवेशक भावना को प्रभावित कर सकता है जो ईंधन की लागत के प्रति संवेदनशील हैं।

निवेशक 24,000 के सपोर्ट लेवल के आसपास सूचकांकों के व्यवहार पर नजर रख सकते हैं, जिसे तकनीकी विश्लेषक अक्सर आगे की गिरावट या स्थिरता के संकेतों के लिए देखते हैं। इसके अलावा, अमेरिका-ईरान राजनयिक स्थिति पर कोई भी अपडेट आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा कीमतों और इक्विटी बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रिगर बना रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.