Sensex: कच्चे तेल की कीमतों में आग, 1,124 अंक टूटकर बंद हुआ बाजार

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Sensex: कच्चे तेल की कीमतों में आग, 1,124 अंक टूटकर बंद हुआ बाजार

ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी गई। ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम **$106.7** प्रति बैरल तक पहुंचने से महंगाई बढ़ने का डर निवेशकों पर हावी रहा और Sensex **1,124** अंक लुढ़क गया।

सोमवार को बाजार में मची हलचल की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव रहा, जिसने एनर्जी कॉस्ट को सीधे प्रभावित किया है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में उछाल सीधे तौर पर देश के इंपोर्ट बिल और रुपये की वैल्यू पर दबाव डालता है। इसका सीधा असर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ता है, विशेषकर ऑटो, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर, जो ईंधन की कीमतों पर काफी हद तक निर्भर हैं।

बाजार का हाल

सेंटीमेंट पूरी तरह से नेगेटिव रहा। Nifty PSU Bank इंडेक्स 3.24% की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ, जो बताता है कि फाइनेंशियल स्टॉक्स को लेकर निवेशक सतर्क हो गए हैं। इसके अलावा रियल्टी, मेटल और ऑटो सेक्टर में भी बिकवाली का दबाव बना रहा। बाजार में डर का पैमाना माने जाने वाला India VIX भी 12.17% की उछाल के साथ 13.64 पर पहुंच गया है, जो बताता है कि ट्रेडर्स आने वाले दिनों में और उठा-पटक के लिए तैयार हैं।

बड़े शेयरों में बड़ी गिरावट

मार्केट को दिशा देने वाले दिग्गज शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दिखी। Reliance Industries के शेयर में 2.24%, HDFC Bank में 2.30%, State Bank of India में 2.10% और ICICI Bank में 1.90% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, इस कठिन समय में IT सेक्टर ने कुछ राहत दी, जहाँ Infosys ने हल्की बढ़त के साथ कारोबार खत्म किया, क्योंकि रुपये की अस्थिरता के दौरान IT को अक्सर एक 'डिफेंसिव' निवेश माना जाता है।

टेक्निकल चार्ट क्या कहते हैं?

Nifty 50 अब 22,800 के अहम स्तर के नीचे फिसलकर 22,780 पर बंद हुआ है। अब ट्रेडर्स की नजर 22,650 से 22,700 की रेंज पर है, जो अगला बड़ा सपोर्ट जोन है। अगर यह लेवल टूटता है, तो इंडेक्स पर और दबाव बढ़ सकता है। बाजार में रिकवरी के लिए इंडेक्स का 22,850 से 22,950 के दायरे में दोबारा पहुंचना जरूरी होगा।

फिलहाल निवेशक अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग डेटा पर नजर बनाए हुए हैं। इन्हीं फैक्टर से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले तय होंगे, जिसका असर भारतीय बाजारों में कैपिटल फ्लो पर भी दिखेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.