Saudi Arabia: बढ़ते तनाव के बीच 'Davos in the Desert' स्थगित, 2027 तक टला बड़ा इवेंट

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AuthorAditya Rao|Published at:
Saudi Arabia: बढ़ते तनाव के बीच 'Davos in the Desert' स्थगित, 2027 तक टला बड़ा इवेंट

सऊदी अरब ने अपने प्रमुख फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव (FII) को 2027 तक के लिए टाल दिया है। इसका मुख्य कारण रीजनल सिक्योरिटी की चिंताएं बताई जा रही हैं। यह इवेंट देश के विजन 2030 (Vision 2030) के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, और इसका सीधा असर भारत समेत ग्लोबल मार्केट पर पड़ सकता है।

सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर अपने वार्षिक 'फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव' (FII), जिसे 'Davos in the Desert' के नाम से भी जाना जाता है, को 2027 तक स्थगित कर दिया है। यह फैसला रीजनल अस्थिरता और सऊदी के प्रमुख एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर ठिकानों पर सुरक्षा संबंधी घटनाओं के बीच लिया गया है। यह इवेंट मूल रूप से 2026 के अंत में होना था।

विजन 2030 पर क्या होगा असर?

यह समिट सऊदी पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (Public Investment Fund) का मुख्य मंच है, जिसके जरिए वे ग्लोबल कैपिटल को आकर्षित करते हैं। 'विजन 2030' का लक्ष्य सऊदी अरब को तेल पर निर्भरता से हटाकर टूरिज्म, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर में विस्तार करना है। इस समिट के जरिए ग्लोबल सीईओ और पॉलिसी मेकर्स सऊदी की 'गीगा-प्रोजेक्ट्स' में निवेश पर बात करते थे, जिस पर अब अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।

भारतीय निवेशकों के लिए संकेत

भारत के लिए सऊदी अरब क्रूड ऑयल का एक प्रमुख सप्लायर और व्यापारिक भागीदार है। वहां कार्यरत भारतीय इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन कंपनियां 'विजन 2030' से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स का हिस्सा हैं। क्षेत्र में बढ़ता तनाव न केवल एनर्जी प्राइस में उतार-चढ़ाव ला सकता है, बल्कि भारतीय कंपनियों के बिजनेस आउटलुक और रेमिटेंस (Remittances) को भी प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल, मार्केट की नजरें सऊदी सरकार की अगली गाइडलाइंस और क्रूड ऑयल की कीमतों पर टिकी हैं, क्योंकि वहां की भौगोलिक स्थिति का सीधा कनेक्शन ग्लोबल सप्लाई चेन से है।

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