Saubhagya स्कीम ने **2.86 करोड़** घरों को बिजली से जोड़ा, जिसमें उत्तर प्रदेश के **91.8 लाख** घर शामिल हैं। हालांकि यह स्कीम **2022** में पूरी हो गई, लेकिन अब निवेशकों की नजरें DISCOMs की फाइनेंशियल हेल्थ और नए RDSS स्कीम के प्रदर्शन पर टिकी हैं।
Pradhan Mantri Sahaj Bijli Har Ghar Yojana (Saubhagya) ने मार्च 2022 में अपना सफर पूरा किया। इस स्कीम ने भारत में एनर्जी एक्सेस के ट्रैक रिकॉर्ड को पूरी तरह बदल दिया। केवल इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि घर-घर बिजली पहुंचाने पर जोर दिया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा।
कनेक्टिविटी से फाइनेंशियल वायबिलिटी की ओर
निवेशकों के लिए असली चुनौती सिर्फ कनेक्शन देना नहीं, बल्कि उन सरकारी DISCOMs की आर्थिक सेहत को सुधारना है जो इस पूरे नेटवर्क को संभाल रहे हैं। पावर सप्लाई की लागत और रेवेन्यू के बीच का अंतर (ACS-ARR gap) आज भी निवेशकों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। रूरल एरिया में सप्लाई की लागत ज्यादा होने के कारण, अगर बिलिंग और कलेक्शन में सुधार नहीं हुआ, तो इन सरकारी कंपनियों पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है।
CAG ऑडिट और जमीनी हकीकत
साल 2025 में Comptroller and Auditor General (CAG) की एक रिपोर्ट ने सरकारी दावों पर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई राज्यों में बिजली पहुंचाने के आंकड़े जमीनी हकीकत से अलग थे, क्योंकि कुछ दुर्गम इलाकों को रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया था। यह निवेशकों के लिए एक सबक है कि वे केवल हेडलाइन डेटा पर भरोसा न करें और सरकारी यूटिलिटीज के ऑपरेशनल डेटा की गहराई से जांच करें।
आगे का रास्ता: RDSS का जोर
अब पूरा फोकस Revamped Distribution Sector Scheme (RDSS) पर है। पिछली स्कीम के उलट, यह नई पहल केवल इंफ्रास्ट्रक्चर पर नहीं, बल्कि एफिशिएंसी पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसमें स्मार्ट मीटर लगाने और ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन लॉसेस को कम करने पर जोर दिया जा रहा है।
अब पावर सेक्टर की सफलता कनेक्शन की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से मापी जाएगी कि बिजली की सप्लाई कितनी प्रॉफिटेबल और भरोसेमंद है। निवेशकों को आने वाले कुछ सालों में यह देखना होगा कि स्टेट डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां अपनी रेवेन्यू साइकिल और पुरानी हो चुकी बुनियादी सुविधाओं को कितनी तेजी से अपग्रेड करती हैं।
