S&P Rating: भारत की साख बरकरार! S&P ने स्थिर रेटिंग के साथ जताई यह बड़ी उम्मीद

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AuthorNeha Patil|Published at:
S&P Rating: भारत की साख बरकरार! S&P ने स्थिर रेटिंग के साथ जताई यह बड़ी उम्मीद

S&P Global Ratings ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को 'BBB-/A-2' पर बरकरार रखा है और आउटलुक 'स्टेबल' बना हुआ है। एजेंसी ने भारत की ग्रोथ रेट **6.6%** रहने का अनुमान जताया है।

भरोसे का संकेत

S&P Global Ratings ने 27 अगस्त, 2026 को भारत की लॉन्ग-टर्म सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को 'BBB-' और शॉर्ट-टर्म रेटिंग को 'A-2' पर स्थिर रखा है। यह फैसला भारतीय आर्थिक नीतियों में ग्लोबल मार्केट का भरोसा कायम रखने वाला है। हालांकि, रेटिंग एजेंसी ने कुछ स्ट्रक्चरल चुनौतियों को लेकर सतर्कता भी बरती है।

क्यों मिला 'स्टेबल' का टैग?

एजेंसी का मानना है कि भारत की विकास दर मजबूत बनी रहेगी। इसका सबसे बड़ा श्रेय सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार बढ़ते खर्च को जाता है। यह निवेश न केवल इकोनॉमिक एक्टिविटी को रफ्तार दे रहा है, बल्कि ग्लोबल अनिश्चितता के दौर में भी डिमांड को सपोर्ट कर रहा है।

ये हैं चिंता के मुख्य कारण

हालांकि भारत 'इन्वेस्टमेंट-ग्रेड' की श्रेणी में है, लेकिन S&P ने रेटिंग अपग्रेड नहीं की है। इसके पीछे दो मुख्य चुनौतियां हैं:

  • हाई पब्लिक डेट: सरकार पर कर्ज का बोझ अभी भी काफी अधिक है।
  • फिस्कल डेफिसिट: सरकार की आमदनी और खर्च के बीच का अंतर (फिस्कल डेफिसिट) कम करना एक बड़ी चुनौती है।

इसके अलावा, क्रूड ऑयल के आयात पर निर्भरता भी एक बड़ा रिस्क है। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारतीय अर्थव्यवस्था के एक्सटर्नल बैलेंस पर दबाव डाल सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है मतलब?

मार्केट के नजरिए से यह एक न्यूट्रल खबर है। अच्छी बात यह है कि भारत 'इन्वेस्टमेंट-ग्रेड' में बना हुआ है, जिससे विदेशी फंड्स का प्रवाह जारी रहेगा। हालांकि, एजेंसी ने जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.6% रखा है, जो यह दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था अब पिछले दौर की तुलना में थोड़े ठंडे फेज से गुजर रही है। आने वाले समय में सरकार का फिस्कल मैनेजमेंट और मॉनसून का प्रदर्शन तय करेगा कि भारत की क्रेडिट प्रोफाइल आगे कैसे बदलती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.