S&P Global ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहा बेतहाशा खर्च दुनिया भर में ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकता है। टेक कंपनियों के बढ़ते कर्ज से सरकारी बॉन्ड मार्केट पर दबाव (crowding out) का खतरा मंडरा रहा है।
बॉन्ड मार्केट पर 'क्राउडिंग आउट' का खतरा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में बड़ी टेक कंपनियां डेटा सेंटर और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भारी मात्रा में कर्ज ले रही हैं। S&P Global के एनालिस्ट्स का मानना है कि टॉप टेक्नोलॉजी कंपनियों का सालाना डेट इश्यूएंस (Debt issuance) 2027 तक $1 ट्रिलियन के आंकड़े को पार कर सकता है। जब निजी कंपनियां इतना कर्ज लेती हैं, तो यह सरकारी बॉन्ड के लिए उपलब्ध पूंजी को अपनी ओर खींच लेती हैं, जिससे ब्याज दरें ऊपर बनी रहती हैं। इसी को इकोनॉमिक्स में 'क्राउडिंग आउट' कहा जाता है, जो सरकार और आम व्यवसायों के लिए फंडिंग को महंगा बनाता है।
कैश फ्लो की चुनौतियां
S&P Global Ratings ने संकेत दिया है कि दुनिया की सबसे बड़ी 6 'हाइपरस्केलर्स' कंपनियां 2027 तक नेगेटिव 'फ्री ऑपरेटिंग कैश फ्लो' दर्ज कर सकती हैं। अगर AI में किया गया निवेश उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं देता है, तो इन कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव आ सकता है, जिससे स्टॉक और क्रेडिट मार्केट में अस्थिरता बढ़ सकती है।
भारत के लिए क्या हैं मायने?
इस ग्लोबल हलचल के बीच भारत को एक अहम 'ग्रोथ इंजन' के रूप में देखा जा रहा है। अन्य देशों के मुकाबले भारत की बड़ी घरेलू मांग इसे ग्लोबल झटकों से कुछ सुरक्षा प्रदान करती है। हालांकि, महंगाई और ऊर्जा लागत का दबाव यहां भी बना हुआ है। अब निवेशकों को सेंट्रल बैंक की पॉलिसी और टेक कंपनियों के डेट-टू-इक्विटी ट्रेंड्स पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
