S&P Global ने FY27 में भारत की GDP ग्रोथ **7%** रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव के कारण ऊर्जा आयात में बाधाएं और महंगाई का जोखिम बना हुआ है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आने वाला समय काफी अहम है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में 7.8% की दमदार ग्रोथ के बाद, S&P Global ने अब FY27 के लिए 7% की विकास दर का अनुमान लगाया है। इस ग्रोथ को बनाए रखने के लिए घरेलू मांग का मजबूत होना तो जरूरी है ही, साथ ही उत्पादकता बढ़ाने और फाइनेंशियल मार्केट के विस्तार पर भी फोकस करना होगा।
ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन का संकट
एजेंसी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी भू-राजनीतिक तनाव को लेकर चेतावनी दी है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा ट्रांजिट के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, और यहां की उठा-पटक सीधे तौर पर भारत के इंपोर्ट बिल पर असर डालती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो देश के एनर्जी इंपोर्ट में खासी गिरावट आई है: कच्चे तेल में 20%, LPG में 12% और LNG में 16% की कमी देखी गई है। यह स्थिति न केवल महंगाई का दबाव बढ़ाती है, बल्कि ट्रेड बैलेंस को भी बिगाड़ सकती है। ऐसे में भारत के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना और रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ तेजी से बढ़ना अनिवार्य हो गया है।
गेम-चेंजर बनेगा डिजिटल रुपया
रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल रुपया (Digital Rupee) भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यानी DPI का चौथा बड़ा स्तंभ साबित हो सकता है। इसमें प्रोग्रामेबल नियमों को जोड़कर पैसों के ट्रांसफर और ट्रैकिंग को बेहद आसान बनाया जा सकता है। इससे फाइनेंशियल सेटलमेंट की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी, जिससे लंबे समय में कैपिटल मार्केट को काफी मजबूती मिलेगी।
भविष्य के लिए क्या हैं संकेत?
भारत की विकास दर अब वैश्विक ऊर्जा कीमतों की स्थिरता और ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर करेगी। इसके अलावा, राज्यों में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर खर्च और प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) की नीति भविष्य की ग्रोथ तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। निवेशकों को अब डिजिटल रुपये के इवोल्यूशन और ऊर्जा मोर्चों पर आने वाली खबरों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
