ग्लोबल बाजारों में S&P 500 इंडेक्स **8,000** के अहम पड़ाव पर नजरें गड़ाए हुए है। सट्टेबाजी बाजारों के अनुसार, साल 2026 तक इस लक्ष्य को हासिल करने की संभावना **31%** है। फिलहाल **7,659** पर ट्रेड कर रहा यह इंडेक्स मजबूत अर्निंग्स और बढ़ते एनर्जी कॉस्ट के बीच झूल रहा है।
बाजार की मौजूदा चाल
S&P 500 फिलहाल 7,659.44 के स्तर पर है। साल 2026 के अंत तक 8,000 का लक्ष्य पाने के लिए इसे लगभग 4.4% और चढ़ना होगा। फिलहाल बाजार में कॉर्पोरेट अर्निंग्स, कमोडिटी की कीमतें और मॉनेटरी पॉलिसी के बीच एक बड़ा 'टग-ऑफ-वार' चल रहा है।
अर्निंग्स और मार्जिन की असलियत
तीसरी तिमाही के नतीजे दमदार दिख रहे हैं, जिसमें साल-दर-साल 29% की ग्रोथ देखी गई है। करीब 84% कंपनियों ने अनुमानों से बेहतर नतीजे पेश किए हैं, लेकिन सरप्राइज का औसत महज 2.6% रहा है, जो कि 7.5% के पांच साल के औसत से काफी कम है। यह साफ दर्शाता है कि कंपनियां रेवेन्यू बढ़ाने के बजाय मार्जिन को टाइट करके प्रॉफिट दिखा रही हैं।
एनर्जी कॉस्ट और AI का रिस्क
निवेशकों की चिंता का बड़ा कारण एनर्जी सेक्टर है। ब्रेंट क्रूड $110 प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है, जो इकॉनमी पर टैक्स की तरह बोझ डाल रहा है। साथ ही, AI स्टॉक्स की रैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि AI सेक्टर की ग्रोथ 100% से घटकर अगले दो साल में 22% पर आ सकती है। इसी वजह से निवेशक अब हाई-बीटा टेक शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं।
फेडरल रिजर्व की नजरें
फिक्स्ड इनकम मार्केट ने फिलहाल 27-28 अक्टूबर की फेडरल रिजर्व मीटिंग में रेट हाइक की उम्मीद छोड़ दी है। फेड प्रमुख केविन वॉर्श के बयानों ने बाजार को थोड़ा स्थिर किया है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि कंपनियां बढ़ते इनपुट कॉस्ट के बीच मार्जिन को कैसे मैनेज करती हैं और फेड के फैसलों पर बाजार कैसा रिएक्ट करता है।
