Samsung ने भारत में अपनी मोबाइल प्रोडक्शन स्ट्रैटेजी को पूरी तरह बदल दिया है। कंपनी अब सरकारी PLI स्कीम के तहत एक्सपोर्ट बढ़ाने पर जोर दे रही है, ताकि ग्लोबल डिमांड को पूरा किया जा सके।
एक्सपोर्ट हब बनेगा भारत
Samsung अपनी ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग स्ट्रैटेजी को फिर से तैयार कर रही है और इसके लिए नोएडा स्थित अपनी यूनिट्स को एक्सपोर्ट का बड़ा हब बनाने की तैयारी है। कंपनी का मुख्य लक्ष्य केंद्र सरकार की ₹62,300 करोड़ वाली 'लार्ज-स्केल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' का लाभ उठाना है। इस प्रोग्राम के तहत कंपनियों को अपने प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट के सालाना लक्ष्यों को पूरा करने पर बड़ा इंसेंटिव मिलता है। Samsung के लिए यह लक्ष्य फिस्कल ईयर 2027 से शुरू होने वाले इंक्रीमेंटल एक्सपोर्ट थ्रेशोल्ड से जुड़े हैं।
लोकल सप्लाई चेन और वैल्यू एडिशन
अब तक Samsung के लिए वियतनाम सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग बेस रहा है, लेकिन अब कंपनी भारत पर ज्यादा भरोसा जता रही है। PLI स्कीम की शर्तों के मुताबिक, कंपनियों को 2026 के बेसलाइन के मुकाबले हर साल सेल में कम से कम ₹5,000 करोड़ का इजाफा करना होगा। यह टारगेट 2031 तक लगातार बढ़ते जाएंगे। सिर्फ मोबाइल ही नहीं, बल्कि डिस्प्ले मॉड्यूल, कैमरा सिस्टम और बैटरी जैसी चीजों को भी अब भारत में ही असेंबल किया जा रहा है, जिससे डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन को 45% तक ले जाने का लक्ष्य है।
सेक्टर पर क्या होगा असर?
Dixon Technologies जैसी कंपनियों और अन्य कंपोनेंट सप्लायर्स के लिए यह खबर काफी अहम है। जब बड़ी कंपनियां भारत में अपना फुटप्रिंट बढ़ाती हैं, तो पूरा इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम मजबूत होता है। हालांकि, Samsung India एक प्राइवेट एंटिटी है, इसलिए इसका सीधा असर शेयर बाजार पर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट की सेहत का एक बड़ा इंडिकेटर जरूर है।
चुनौतियां और जोखिम
PLI स्कीम का ढांचा तो मजबूत है, लेकिन राह आसान नहीं है। ग्लोबल मार्केट में डिमांड की अनिश्चितता और सेमीकंडक्टर-मेमोरी चिप्स की बदलती कीमतें कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बनी रहेंगी। इसके अलावा, वियतनाम जैसे सस्ते हब के मुकाबले लागत को कम रखना एक बड़ी जंग है। हालांकि, चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 5 महीनों में ही कंपनी $2.6 बिलियन का एक्सपोर्ट हासिल कर चुकी है, जो आने वाले समय के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
