Samsung ने भारत में अपनी मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी कर ली है। कंपनी का मकसद सरकार की **₹62,300 करोड़** वाली प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का लाभ उठाना है।
भारत बनेगा ग्लोबल एक्सपोर्ट हब
Samsung अब अपने ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क को फिर से तौल रहा है, जिसमें भारत को एक प्रमुख एक्सपोर्ट हब के रूप में प्राथमिकता दी जा रही है। कंपनी अपनी प्रोडक्शन स्ट्रैटेजी में बदलाव कर वियतनाम जैसे पारंपरिक हब से हटकर भारत पर ज्यादा फोकस कर रही है। यह पूरा कदम सरकारी इंसेंटिव्स के इर्द-गिर्द बुना गया है।
इंसेंटिव का गणित और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग
इस PLI स्कीम के तहत सरकार 2.5% से 5% तक का इंसेंटिव दे रही है। यदि कंपनी डिस्प्ले मॉड्यूल, बैटरी और केबल जैसे कंपोनेंट्स की सोर्सिंग भारत से करती है, तो उसे अतिरिक्त 1.5% का इंसेंटिव मिल सकता है। सरकार का लक्ष्य अगले 5 सालों में घरेलू वैल्यू एडिशन को 40% से 45% तक ले जाने का है।
रिस्क फैक्टर और निवेशकों के लिए अलर्ट
ग्रोथ की संभावनाओं के बीच कुछ बड़े रिस्क भी हैं। ग्लोबल मार्केट में मेमोरी चिप की ऊंची कीमतें कंपनी के मार्जिन पर दबाव डाल रही हैं। साथ ही, इंटरनेशनल डिमांड में अनिश्चितता ने मैनेजमेंट को भी सतर्क कर दिया है। फिलहाल कंपनी का पूरा जोर कॉस्ट एफिशिएंसी पर है। अगर ग्लोबल डिमांड में सुधार नहीं होता, तो सैमसंग अपनी कैपेसिटी बढ़ाने की रफ्तार धीमी कर सकती है। निवेशकों को कंपनी के कैपिटल स्पेंडिंग प्लान और एनुअल ग्रोथ टारगेट्स पर नजर रखनी चाहिए, जो सरकारी फायदों के लिए अनिवार्य हैं।
