हॉटमेल के को-फाउंडर सबीर भाटिया ने भारत में **55%** इनहेरिटेंस टैक्स (Inheritance Tax) लगाने का सुझाव दिया है। इस प्रस्ताव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि यह फैमिली-रन बिजनेस और शेयर बाजार में लिक्विडिटी को प्रभावित कर सकता है।
हॉटमेल के को-फाउंडर सबीर भाटिया ने भारत में 55% इनहेरिटेंस टैक्स लगाने का एक नया और तीखा विवाद छेड़ दिया है। भाटिया का मुख्य तर्क यह है कि व्यक्तिगत योग्यता को बढ़ावा देने के लिए पैतृक संपत्ति पर टैक्स लगना चाहिए ताकि धन का संकेंद्रण कम हो सके। निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि भारत में 1985 में 'एस्टेट ड्यूटी एक्ट' को खत्म कर दिया गया था और फिलहाल देश में ऐसा कोई टैक्स नहीं है। यह अभी सिर्फ एक सार्वजनिक सुझाव है, सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक पॉलिसी नहीं है।
बाजार पर असर
अगर ऐसा कोई नियम लागू होता है, तो इसका सबसे सीधा असर फैमिली-रन कंपनियों पर पड़ेगा, जिनका भारतीय इक्विटी मार्केट में बड़ा योगदान है। अक्सर प्रमोटर्स अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा कंपनी के शेयर्स के रूप में रखते हैं। यदि उत्तराधिकारियों को 55% टैक्स चुकाना पड़ा, तो लिक्विडिटी की कमी के कारण उन्हें मार्केट में अपने शेयर्स बेचने पड़ सकते हैं। इससे रिटेल निवेशकों के लिए स्टॉक प्राइस में दबाव की स्थिति पैदा हो सकती है।
प्राइवेट एसेट्स की जटिलता
प्राइवेट संपत्ति, जैसे कि जमीन या गहनों की वैल्यूएशन निकालना अपने आप में एक बड़ा सिरदर्द है। यदि सरकार इस टैक्स के लिए कोई ठोस राहत या किस्तों (Installments) की सुविधा नहीं देती, तो परिवारों को अपनी संपत्ति को सस्ते दाम पर बेचने (Distressed Sales) पर मजबूर होना पड़ सकता है।
कैपिटल फ्लाइट का रिस्क
ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि जहां भी इनहेरिटेंस टैक्स ज्यादा होता है, वहां अमीर लोग अपनी संपत्ति को ट्रस्ट या होल्डिंग कंपनियों में ट्रांसफर करने लगते हैं। इसका एक सीधा नुकसान यह होता है कि घरेलू अर्थव्यवस्था से पैसा बाहर जाने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे बिजनेस विस्तार के लिए जरूरी कैपिटल कम हो सकती है।
निवेशकों के लिए फिलहाल सलाह यही है कि वे सरकारी नीति पर नजर रखें। अभी तक यह केवल एक सैद्धांतिक चर्चा है, लेकिन भविष्य में टैक्स नियमों में कोई भी बदलाव वेल्थ मैनेजमेंट के तरीकों को पूरी तरह से बदल सकता है।
