बजट का बड़ा ऐलान: F&O पर STT में भारी इजाफा
यूनियन बजट 2026-27 में सरकार ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में ट्रेड करने वालों के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की दरों में इजाफा कर दिया है, जिसका सीधा असर डेरिवेटिव्स मार्केट पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इसका मकसद रिटेल इन्वेस्टर्स को भारी सट्टेबाजी वाले नुकसान से बचाना है।
क्या हैं नए STT रेट्स?
1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले इन बदलावों के तहत, फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05% हो जाएगा। यह 150% की बढ़ोतरी है। वहीं, ऑप्शंस के प्रीमियम पर लगने वाला STT 0.10% से बढ़कर 0.15% कर दिया गया है। इसके अलावा, ऑप्शंस के एक्सरसाइज पर लगने वाला STT भी 0.125% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। इस बढ़ोतरी से ट्रेडर्स के लिए ट्रेडिंग कॉस्ट काफी बढ़ जाएगी, खासकर उन स्ट्रेटेजीज़ में जहां मार्जिन कम होता है।
सरकार की मंशा: निवेशक सुरक्षा या मार्केट पर चोट?
सरकार के इस कदम के पीछे SEBI के चौंकाने वाले आंकड़े हैं। SEBI की रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में 90% से ज़्यादा रिटेल इन्वेस्टर्स ने F&O सेगमेंट में नुकसान उठाया, जिसकी कुल राशि लगभग ₹1.06 लाख करोड़ थी। यूनिक रिटेल ट्रेडर्स की संख्या भी घटी है, जो 1.06 करोड़ से घटकर दिसंबर 2025 तक लगभग 75.43 लाख रह गई है। सरकार का मानना है कि टैक्स बढ़ाने से अनावश्यक सट्टेबाजी पर लगाम लगेगी।
मार्केट का तुरंत रिएक्शन
इस बड़े ऐलान के तुरंत बाद शेयर बाजार में गिरावट देखी गई। बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty में बजट की घोषणा के बाद तेज गिरावट दर्ज की गई। इस टैक्स बढ़ोतरी से ट्रेडर्स के लिए ब्रेक-ईवन पॉइंट बढ़ जाएगा, जिसका असर ऑप्शंस सेलिंग और हाई-टर्नओवर वाले फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर पड़ेगा।
एक्सपर्ट्स की राय और चिंताएं
एक्सपर्ट्स का मानना है कि STT में बढ़ोतरी से मार्केट की लिक्विडिटी कम हो सकती है। बढ़ी हुई ट्रेडिंग कॉस्ट की वजह से कुछ ट्रेडर्स इंटरनेशनल एक्सचेंजों या गिफ्ट सिटी (GIFT City) का रुख कर सकते हैं, जिसका सीधा असर डोमेस्टिक ब्रोकर्स और इंटरमीडियरीज पर पड़ेगा। हालांकि, सरकार इसे सिस्टमैटिक रिस्क को मैनेज करने का तरीका बता रही है, लेकिन यह भारत के डेरिवेटिव्स मार्केट की ग्रोथ को धीमा कर सकता है।
ग्लोबल और हिस्टोरिकल कॉन्टेक्स्ट
दुनिया के कई देशों में ट्रांजैक्शन टैक्स का इस्तेमाल मार्केट एक्टिविटी को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। भारत में STT में बढ़ोतरी से कुछ फॉरेन पोर्टफोलिओ इन्वेस्टर्स (FPIs) के लिए यह सेगमेंट कम आकर्षक हो सकता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स पर इसका खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। इससे पहले भी STT दरों में बदलाव से ट्रेडिंग पैटर्न पर असर पड़ा है, लेकिन इस बार फ्यूचर्स पर यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है।
आगे क्या?
मार्केट पार्टिसिपेंट्स का मानना है कि आने वाले समय में वोलेटिलिटी बढ़ सकती है क्योंकि ट्रेडर्स नई कॉस्ट के हिसाब से अपनी स्ट्रेटेजीज़ को एडजस्ट करेंगे। आर्बिट्राज और हाइब्रिड म्यूचुअल फंड्स पर भी इसका असर थोड़ा देखने को मिल सकता है। यह कदम सट्टेबाजी पर लगाम लगाने और निवेशक सुरक्षा बढ़ाने के सरकारी इरादे को दिखाता है, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि क्या सिर्फ टैक्स से डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के जोखिमों को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।
