Samajwadi Party के प्रमुख Akhilesh Yadav ने उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने पर Old Pension Scheme (OPS) को बहाल करने का वादा किया है। यह कदम मौजूदा National Pension System (NPS) से हटकर है, जो राज्य के बजट पर लॉन्ग-टर्म वित्तीय दबाव को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।
OPS बनाम NPS: क्या है आर्थिक संकट?
Samajwadi Party के इस ऐलान ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। वर्तमान में लागू National Pension System (NPS) एक 'डिफाइंड-कंट्रीब्यूशन' मॉडल है, जिसमें कर्मचारी और सरकार दोनों का योगदान होता है और फंड मार्केट से जुड़ा होता है। वहीं, Old Pension Scheme (OPS) एक 'डिफाइंड-बेनिफिट' मॉडल है, जहां रिटायरमेंट के बाद सरकार अंतिम वेतन के आधार पर तय पेंशन देती है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि OPS में पेंशन का पूरा बोझ सरकार पर आता है, जो राज्य के सरकारी खजाने के लिए लॉन्ग-टर्म में 100% अनिश्चित देनदारियां पैदा कर सकता है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
मार्केट एक्सपर्ट्स और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां राज्यों की वित्तीय स्थिति पर बारीकी से नजर रखती हैं। यदि OPS लागू होता है, तो राज्य के पास इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास कार्यों के लिए कम फंड बचेगा, क्योंकि बजट का एक बड़ा हिस्सा फिक्स्ड पेंशन भुगतान में लॉक हो जाएगा। इससे फिस्कल डेफिसिट बढ़ने का खतरा रहता है, जो अंततः स्टेट बॉन्ड यील्ड और राज्य की क्रेडिट प्रोफाइल को प्रभावित कर सकता है।
चुनावी माहौल और आगे की चुनौती
यह घोषणा 23 अक्टूबर को होने वाले Uttar Pradesh Legislative Council चुनावों से ठीक पहले आई है। पार्टी ने केवल पेंशन ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की भलाई और भर्ती प्रक्रिया को बेहतर बनाने का भी आश्वासन दिया है। अब निवेशकों और आम जनता की नजर इस बात पर है कि यदि यह नीति लागू होती है, तो सरकार रेवेन्यू ग्रोथ और डेट मैनेजमेंट के साथ इन वादों को कैसे बैलेंस करेगी।
