SIDBI Report: MSME सेक्टर में लौटा जोश, बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स उछलकर **60.4** पर पहुंचा

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
SIDBI Report: MSME सेक्टर में लौटा जोश, बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स उछलकर **60.4** पर पहुंचा

जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए MSME बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स **60.4** पर पहुंच गया है, जो छोटे उद्योगों में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। हालांकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी है, लेकिन इनपुट कॉस्ट का बढ़ना अभी भी मुनाफे के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) की ताजा रिपोर्ट ने छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) की सेहत पर बड़ा अपडेट दिया है। जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही के लिए MSME बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स (M-BCI) बढ़कर 60.4 हो गया है, जो पिछली तिमाही में 59.3 पर था। इंडेक्स में 50 से ऊपर का स्कोर यह साफ इशारा करता है कि कारोबारी अब मंदी के बजाय ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं।

मैन्युफैक्चरिंग की सबसे ऊंची उड़ान

सर्वे में सबसे बेहतर प्रदर्शन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का रहा है, जिसका सेंटिमेंट इंडेक्स 61.0 के स्तर पर पहुंच गया है। लगभग 50% कंपनियों ने माना है कि बिजनेस की स्थितियां पहले से बेहतर हुई हैं। घरेलू मांग की मजबूती ने छोटे मैन्युफैक्चरर्स को मुश्किल वक्त में भी संभलने की ताकत दी है।

इनपुट कॉस्ट का 'टेंशन'

खुशी के बीच एक बड़ी चिंता भी है। रॉ मटेरियल की बढ़ती कीमतों ने कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। बड़ी कंपनियों के उलट, छोटे व्यवसायों के पास अपनी कीमतें बढ़ाने की ज्यादा ताकत (Pricing Power) नहीं होती, जिससे उन्हें बढ़ती लागत का बोझ खुद झेलना पड़ता है। निवेशकों के लिए यही सबसे बड़ा 'वॉच-पॉइंट' है कि ये कंपनियां अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को कैसे बचा पाती हैं।

आगे की राह (Future Outlook)

आने वाली तिमाहियों के लिए भी माहौल स्थिर नजर आ रहा है। अक्टूबर-दिसंबर 2026 के लिए बिजनेस एक्सपेक्टेशन इंडेक्स (M-BEI) 61.7 पर है, जो संकेत देता है कि यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है। हालांकि सर्विस और ट्रेडिंग सेक्टर की उम्मीदें मैन्युफैक्चरिंग से थोड़ी कम हैं, लेकिन वे भी पॉजिटिव जोन में बनी हुई हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था में MSMEs का योगदान बहुत बड़ा है, और ये बैंकों के लिए क्रेडिट डिमांड का भी बड़ा जरिया हैं। आने वाले समय में इन कंपनियों का वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट और कर्ज चुकाने की क्षमता ही तय करेगी कि यह ग्रोथ कितनी टिकाऊ है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.