भारत का वाणिज्य विभाग एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है जिससे स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) की इकाइयां घरेलू ग्राहकों से रुपये में भुगतान स्वीकार कर सकेंगी। इस बदलाव का मकसद MRO, इंजीनियरिंग और IT जैसी सेवाओं के लिए विदेशी मुद्रा की अनिवार्यता को खत्म करना है।
SEZ इकाइयों के लिए बड़ी राहत की तैयारी
स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) में काम करने वाली कंपनियों के लिए अच्छी खबर है। भारत सरकार का वाणिज्य मंत्रालय एक ऐसा प्रस्ताव तैयार कर रहा है जिससे SEZ की इकाइयां अब अपने घरेलू (DTA - Domestic Tariff Area) ग्राहकों से सेवाओं के बदले भारतीय रुपये में भुगतान ले सकेंगी। अभी तक, ज्यादातर मामलों में SEZ इकाइयों के लिए विदेशी मुद्रा में भुगतान लेना अनिवार्य होता है।
क्यों हो रहा है ये बदलाव?
इस बदलाव के पीछे मुख्य वजह कुछ अहम सेक्टर्स, जैसे मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO), डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और IT, के लिए विदेशी मुद्रा के नियमों को एक बड़ी बाधा के रूप में देखा जाना है। मौजूदा नियमों के कारण, भारतीय कंपनियां जो SEZ से सेवाएं लेती हैं, उन्हें पहले विदेशी मुद्रा खरीदनी पड़ती है, जिसमें बैंक कमीशन और अन्य शुल्क लगते हैं। फिर SEZ इकाइयां उस विदेशी मुद्रा को वापस रुपये में बदलवाती हैं, जिसमें एक और शुल्क लगता है। इस प्रस्ताव से ये अतिरिक्त लागतें खत्म हो जाएंगी और घरेलू सोर्सिंग को बढ़ावा मिलेगा।
किन सेक्टर्स को होगा फायदा?
यह नियम MRO सुविधाओं के लिए वरदान साबित हो सकता है। नागपुर के MIHAN SEZ या हैदराबाद के GMR Aero SEZ जैसी जगहों पर एयरलाइंस को सेवाएं देने में विदेशी मुद्रा की अनिवार्यता आड़े आ रही थी। इसी तरह, L&T MBDA मिसाइल सिस्टम्स जैसी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां भारतीय वायु सेना को मेंटेनेंस सपोर्ट देने में मुश्किलों का सामना कर रही थीं। IT सेक्टर में भी, सरकारी दफ्तरों और PSU को कभी-कभी घरेलू SEZ इकाइयों के बजाय विदेशी इंपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता था, क्योंकि SEZ इकाइयां रुपये में भुगतान स्वीकार नहीं कर सकती थीं।
'मेक इन इंडिया' को मिलेगा बूस्ट
इस कदम को 'मेक इन इंडिया' पहल को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे SEZ में उपलब्ध उत्पादन और सेवा क्षमताओं को घरेलू बाजार की जरूरतों से बेहतर ढंग से जोड़ा जा सकेगा। इस नीतिगत बदलाव पर वाणिज्य विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और वित्त मंत्रालय के बीच चर्चाएं चल रही हैं। प्रस्ताव को कैबिनेट नोट के रूप में तैयार किया जा रहा है और कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में पेश किया जाएगा।
इस प्रस्ताव के लागू होने से Larsen & Toubro (L&T) और GMR Group जैसी कंपनियों को फायदा हो सकता है, जिनकी SEZ में मजबूत उपस्थिति है। निवेशकों को इस प्रस्ताव पर नजर रखनी चाहिए, खासकर संसद में बिल पेश होने और नए नियमों के तहत लेनदेन और टैक्स संबंधी स्पष्टीकरण पर।
