SEBI की ताज़ा सालाना रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में भारतीय वित्तीय बाज़ारों ने **7.7%** GDP ग्रोथ के साथ ज़बरदस्त घरेलू मजबूती दिखाई है। हालाँकि, जहाँ डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने रिकॉर्ड **$19.7 बिलियन** की विदेशी निवेशक बिकवाली के सामने एक मज़बूत सहारा दिया, वहीं कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव जैसे वैश्विक जोखिम 2026-27 के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
रिकॉर्ड विदेशी बिकवाली और घरेलू सहारा
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने हाल ही में 2025-26 के लिए अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मज़बूत लचीलापन दिखाया है। जहाँ देश की रियल GDP ग्रोथ पिछले साल के 7.1% से बढ़कर 7.7% पर पहुँच गई, वहीं वित्तीय बाज़ारों को बाहरी कारकों से काफी दबाव का सामना करना पड़ा।
पूरे वित्तीय वर्ष में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) की तरफ से भारी बिकवाली देखी गई, जिन्होंने रिकॉर्ड $19.7 बिलियन की रकम निकाली। इस बिकवाली का असर यह हुआ कि अमेरिकी डॉलर के लिहाज़ से देखें तो निफ्टी 50 जैसे प्रमुख बाज़ार सूचकांकों में करीब 14% की गिरावट आई। हालाँकि, घरेलू बाज़ार को स्थानीय संस्थागत निवेशकों, खासकर म्यूचुअल फंडों की तरफ़ से ज़बरदस्त भागीदारी मिली, जिसने एक अहम सहारा प्रदान किया। मार्च 2026 तक इन घरेलू निवेशकों ने इक्विटी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर रिकॉर्ड 17% कर ली, जिससे विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बावजूद बाज़ार को स्थिर रखने में मदद मिली।
वैश्विक जोखिम और मैक्रोइकॉनॉमिक आउटलुक
सरकारी पूंजीगत व्यय और निजी खपत से मिली आंतरिक मजबूती के बावजूद, SEBI ने 2026-27 के आउटलुक के लिए कई जोखिमों की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनाव, खासकर मध्य पूर्व में, एक बड़ी चिंता बनी हुई है। इसके अलावा, यदि कच्चे तेल की कीमतें लगातार $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो इससे भारत की आयात लागत बढ़ सकती है, चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) चौड़ा हो सकता है और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। नियामक का सुझाव है कि इन बाहरी झटकों से आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और आयात विविधीकरण महत्वपूर्ण होंगे।
हालिया नियामक बदलाव
आर्थिक मूल्यांकन के अलावा, बाज़ार नियामक ने बाज़ार दक्षता में सुधार के लिए ट्रेडिंग नियमों को सक्रिय रूप से अपडेट किया है। विशेष रूप से, SEBI ने इक्विटी कैश सेगमेंट के लिए 20 मिनट का नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) पेश किया है, जो 3 अगस्त, 2026 से लागू हो गया है। इस बदलाव का उद्देश्य ट्रेडिंग दिवस के अंतिम क्षणों में बेहतर मूल्य खोज (Price Discovery) में सहायता करना है।
निवेशकों को आने वाली तिमाहियों के लिए प्रमुख संकेतकों के रूप में वैश्विक ऊर्जा कीमतों और पूंजी प्रवाह की लगातार निगरानी करनी चाहिए। वर्तमान बाज़ार मूल्यांकन की स्थिरता और घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती, आने वाले समय में इन वैश्विक दबावों को कितनी अच्छी तरह संभाला जाता है, इस पर निर्भर करेगी।
