SBI Research ने सरकार को सुझाव दिया है कि इक्विटी पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को पूरी तरह खत्म किया जाए। इससे फॉरेन इन्वेस्टर्स की भारी बिकवाली को रोकने और मार्केट सेंटीमेंट को सुधारने में मदद मिल सकती है। इस नुकसान की भरपाई के लिए SBI ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को **50%** तक बढ़ाने का सुझाव दिया है, जिससे लगभग **₹50,000 करोड़** के रेवेन्यू लॉस को कवर किया जा सके।
टैक्स सुधार और सरकारी खजाना
SBI Research की रिपोर्ट के अनुसार, FY28 तक LTCG टैक्स खत्म करने से सरकार को ₹40,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ का रेवेन्यू नुकसान हो सकता है, जो देश के जीडीपी का महज 0.1% से 0.2% है। सरकार के लिए यह नुकसान उठाना मुश्किल नहीं है। इस कमी को पूरा करने के लिए STT में 50% की बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है, जिससे लगभग ₹45,000 करोड़ की रिकवरी की उम्मीद है। हालांकि, STT बढ़ने से हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स और बार-बार शेयर खरीदने-बेचने वालों की लागत बढ़ जाएगी, जबकि लॉन्ग टर्म निवेशकों को टैक्स में बड़ी छूट मिलेगी।
FII बिकवाली का दबाव
साल 2026 में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) ने भारतीय बाजार से ₹3 लाख करोड़ से अधिक की निकासी की है, जिससे Nifty और अन्य इंडेक्स पर भारी दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स में ऐसे स्ट्रक्चरल बदलाव घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकते हैं और बाजार में फिर से नई रौनक ला सकते हैं।
नया टैक्स फ्रेमवर्क और रियायतें
SBI Research ने केवल टैक्स खत्म करने की बात नहीं की, बल्कि एक नया टीयर्ड स्ट्रक्चर भी सुझाया है:
- एग्जम्पशन लिमिट: सालाना छूट सीमा को ₹1.25 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख करने का सुझाव, जिसे महंगाई से जोड़ा जाए।
- टियर्ड टैक्स रेट: 2 से 3 साल तक के निवेश पर 5% टैक्स और 3 साल से अधिक समय तक होल्ड किए गए एसेट्स को पूरी तरह टैक्स-फ्री करने का प्रस्ताव।
आगे क्या?
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये केवल सुझाव हैं, न कि सरकारी नीति। अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय को बजट चर्चाओं के दौरान लेना है। इसके अलावा, बाजार की चाल पर कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर की मजबूती और US बॉन्ड यील्ड का भी असर जारी रहेगा। निवेशकों की नजर अब आगामी यूनियन बजट और सरकार की आधिकारिक घोषणाओं पर बनी रहेगी।
